बीजापुर के गांव में सीएम साय ने ऐसे बढ़ाया हौसला… सरेंडर नक्सली दंपत्ति की दुकान के सामने रोका काफ़िला… पानी बॉटल खरीदी, सराहा उनके साहस को
सीएम विष्णुदेव साय अपनी टीम के साथ बस्तर के घने जंगलों में ऐसे-ऐसे इलाकों में पहुंच रहे हैं, जहां कभी आम लोग भी नहीं जा पाते थे। आज सीएम साय बीजापुर के सुदूर वनग्राम कोण्डापल्ली पहुंचे। चौपाल से पहले सीएम का काफिला अचानक एक छोटी-सी किराना दुकान के सामने रुक गया। यह दुकान पूर्व नक्सली दंपत्ति मासा तामो और जयमोती की थी। दुकान में सीएम साय ने दोनों से आत्मीयता से बातचीत की। उन्होंने पानी की बोतल खरीदी और दोनों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता ही नए जीवन की सबसे बड़ी पहचान है।
मासा तामो का बचपन गरीबी और अभावों में बीता। बचपन में पिता का साया उठ गया और पढ़ाई का अवसर कभी नहीं मिला। वर्ष 2007 में परिस्थितियों के कारण वह नक्सली संगठन से जुड़ गया। उधर जयमोती की कहानी भी संघर्षों से भरी रही। बचपन में माता-पिता का निधन हो गया और जीवन की कठिन परिस्थितियों ने उन्हें भी उसी रास्ते की ओर धकेल दिया। संगठन में दोनों की मुलाकात हुई और वर्ष 2021 में उन्होंने विवाह कर लिया। लेकिन समय के साथ दोनों ने महसूस किया कि हिंसा का रास्ता उनके भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के लिए उचित नहीं है। अक्टूबर 2025 में उन्होंने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।
सीएम साय से चर्चा के दौरान मासा और जयमोती ने बताया कि दुकान से होने वाली आय से परिवार की जरूरतें पूरी हो रही हैं। भविष्य को लेकर नई उम्मीद जगी है। दोनों ने कहा कि कभी नहीं सोचा था कि जीवन में ऐसा बदलाव आएगा, लेकिन सरकार की पुनर्वास नीति और प्रशासन के सहयोग ने उन्हें नई पहचान दी है। सीएम विष्णु देव साय ने कहा कि मासा और जयमोती की कहानी केवल दो व्यक्तियों की कहानी नहीं, बल्कि बदलते बस्तर की कहानी है। यह इस बात का प्रमाण है कि अवसर, विश्वास और सहयोग मिलने पर कोई भी व्यक्ति मुख्यधारा में लौटकर सम्मानजनक जीवन जी सकता है।



