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भीषण गर्मी-लू में आम-बरगद पेड़ों छांव में सीएम साय की चौपाल से सुशासन का संदेश… अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने के लिए सरकार के मुखिया की जद्दोजहद

सुशासन तिहार में सीएम विष्णुदेव साय ने सुकमा से अंबिकापुर तक दर्जनों गांव का अचानक निरीक्षण किया है। कई बार तो सीएम साय और उनके प्रधान सचिव सुबोध सिंह या सीएम हाउस के सचिवों की टीम जब किसी गांव में उतरती है, वहाँ पहुँचने में ज़िले के आला अफसरों को भी समय लग जाता है। लेकिन सीएम की जनचौपाल में किसी का इंतज़ार नहीं होता। जहाँ उतरे, वहीं आसपास आम, बरगद, नीम या किसी भी छायादार पेड़ के नीचे सीएम साय की चौपाल शुरू हो जाती है, फिर भले ही गर्मी 45 डिग्री या ऊपर क्यों न हो। इन चौपालों में सीएम आम लोगों से सीधे बात कर रहे हैं और सुशासन का सख्त संदेश दे रहे हैं। प्रदेश के दूरस्थ गांवों में आज, 6 जून को भी सीएम साय ने ऐसी ही जनचौपालें लगाईं और आम ग्रामीणों से सीधे उनकी ज़रूरतें और समस्याएं पूछीं तथा मौके पर निराकरण की भरसक कोशिश भी नज़र आई।

शनिवार को दोपहर सीएम विष्णु देव साय अपने विशेष सचिव रजत बंसल के साथ मरवाही के दूरस्थ गांव निमधा पहुंचे और आम के पेड़ की छांव में खाट पर बैठकर ग्रामीणों से रूबरू हुए। उनकी समस्याएं सुनीं और शासन की योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का प्रत्यक्ष फीडबैक लिया। उन्होंने ग्रामीणों से बिजली, पानी, राशन, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जिन समस्याओं का तत्काल निराकरण संभव है, उनका मौके पर ही समाधान किया जा रहा है, जबकि अन्य मामलों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।  इस चौपाल में सीएम ने सरई के दोना-पत्तल में परोसे गए स्थानीय व्यंजनों – जामुन, कोईलार भाजी, बेल का शरबत, आम की चटनी और आमपना का स्वाद भी लिया।

मरवाही से उड़कर सक्ती जिले के ग्राम ठठारी में उतरे सीएम साय ने चतुर्भुज तालाब पार स्थित विशाल बरगद के पेड़ की छांव में जनचौपाल लगाकर ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया। खुले वातावरण में आयोजित इस चौपाल में मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं, सुझाव प्राप्त किए तथा शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति का प्रत्यक्ष फीडबैक लिया। जनचौपाल को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य केवल योजनाओं की समीक्षा करना नहीं, बल्कि यह जानना भी है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है या नहीं।

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