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डिब्बों में डीजल-पेट्रोल घर में रखना बहुत खतरनाक… उद्योगों की बेतहाशा जमाखोरी की वजह से भी आम लोग संकट में… बस, 3-4 दिन की दिक्कत

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित कई जिलों में पेट्रोल-डीजल का संकट है। आज गुरुवार को भी शहर के लगभग 25 pump नो स्टॉक बताए गए हैं। इसलिए जो खुले हैं, उनमे बेहद भीड़ है। शहर में पिछले दो दिन से एक खतरनाक प्रवृत्ति यह नज़र आई है कि लोग अपनी हैसियत के मुताबिक़ डिब्बों में पेट्रोल डीजल भरकर रख रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार 44 डिग्री गर्मी में घर में रखा डीजल-पेट्रोल से भरा डिब्बा किसी ज़िंदा बम से कम नहीं है।

हालांकि यह संकट बहुत अस्थायी है। अगले तीन-चार दिनों में मुख्य डिपो से सप्लाई सामान्य होते ही संकट दूर होने की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय प्रशासन और पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा आपूर्ति व्यवस्था को तेजी से दुरुस्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

रायपुर के कई मुख्य पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई हैं और कुछ पंपों पर स्टॉक पूरी तरह खत्म (ड्राई) हो चुका है। पैनिक बाइंग को नियंत्रित करने के लिए पंप संचालकों ने फिलहाल गाड़ियों के लिए पेट्रोल-डीजल वितरण का दायरा सीमित कर दिया है। जिसके तहत मोटरसाइकिलों को अधिकतम 400 रुपए और कारों को 1000 रुपए तक का ही ईंधन दिया जा रहा है।

ईंधन की किल्लत होने के मुख्य कारण अफ़वाहें और उस कारण बाइंग है।  पश्चिम एशिया में जारी अंतरराष्ट्रीय तनाव और ईंधन की कमी की शुरुआती अफवाहों के बाद लोगों, खासकर कुछ विशिष्ट उद्योगों से जुड़े उद्योगपतियों और कारोबारियों ने जरूरत से ज्यादा तेल स्टॉक करना शुरू कर दिया, जिससे मांग अचानक दोगुनी हो गई।

ऑयल एसोसिएशन के अनुसार, कंपनियों के मुख्य डिपो से मांग के अनुपात में पर्याप्त मात्रा में सप्लाई नहीं मिल पा रही है। इसी तरह, औद्योगिक क्षेत्रों (इंडस्ट्रीज) को मिलने वाले भारी कमर्शियल डीजल की कीमतें अधिक होने के कारण, कई उद्योग सीधे पेट्रोल पंपों से थोक में डीजल खरीद रहे हैं, जिससे आम जनता के लिए पेट्रोल पंपों का कोटा समय से पहले समाप्त हो रहा है। प्रशासन ने आम जनता से पैनिक बाइंग न करने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है, ताकि सप्लाई को जल्द से जल्द पूरी तरह रीस्टोर किया जा सके।

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