पूरी दुनिया में पंडवानी और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करनेवाली पद्मविभूषण तीजन बाई का निधन… पीएम मोदी, सीएम साय ने जताया शोक
छत्तीसगढ़ का नाम पूरी दुनिया में रोशन करनेवाली मशहूर पंडवानी लोकगायिका और पद्मविभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई का 70 वर्ष की आयु में आज रविवार 5 जुलाई को तड़के 3:15 बजे रायपुर एम्स (AIIMS) में निधन हो गया है। वे पिछले काफी समय से गंभीर बीमारियों (फेफड़ों में संक्रमण, सेप्सिस और किडनी की समस्या) से जूझ रही थीं। उनके निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम विष्णु देव साय ने गहरा दुख व्यक्त किया है। सीएम साय ने घोषणा की है कि तीजन बाई का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव गनियारी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ में दुर्ग जिले के गनियारी में जन्मी तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज, कड़क अभिनय और हाथ में तंबूरा लेकर महाभारत की कथाओं को जीवंत किया और ‘पंडवानी’ लोक कला को वैश्विक मंच पर स्थापित किया। तीजन बाई पंडवानी में कापालिक शैली की पहली महिला थीं। छत्तीसगढ़ में पारंपरिक रूप से पुरुष ही पंडवानी गाते थे. तीजन बाई ने सामाजिक बंधनों को तोड़कर खड़े होकर गाए जाने वाली ‘कापालिक शैली’ को अपनाया और ऐसा करने वाली पहली महिला कलाकार बनीं। रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सामने प्रस्तुति देने का अवसर दिलाया। इसके बाद उन्होंने श्याम बेनेगल के धारावाहिक ‘भारत एक खोज’ में भी काम किया और दुनिया भर (एशिया और यूरोप) में प्रस्तुतियां दीं।
भारतीय लोक कला में अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें देश के तीनों सर्वोच्च पद्म पुरस्कारों सहित कई सम्मान मिले। तीजनबाई को पद्मश्री (1988), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995), पद्म भूषण (2003), फुकुओका पुरस्कार जापान (2018) और पद्म विभूषण से 2019 में नवाज़ा गया।



