ई-चालान के खिलाफ यातायात महासंघ ने खोला मोर्चा… सुनवाई से पहले ही जुर्माना न्याय के सिद्धांत के खिलाफ… चालान निरस्त करने की मांग
छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ ने यात्री वाहनों, मालवाहनों तथा कार-दोपहिया पर किए जा रहे ई-चालान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महासंघ ने कहा है कि यह चालान प्रक्रिया न्यायसंगत नहीं है, क्योंकि सुनवाई किए बिना जुर्माना करना न्यायसंगत नहीं है। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अनवर अली तथा पदाधिकारियों रायपुर पुलिस कमिश्नर डा. संजीव शुक्ला से पत्र लिखकर आग्रह किया है कि सभी आनलाइन चालान को निरस्त कर सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए।
संघ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पुलिस एवं परिवहन विभाग वाहनों की पीछे से तस्वीर वाला फुटेज लगाकर हजारों रुपए का चालान कर रहे हैं। हर चालान में निश्चित राशि पहले से दर्ज कर दी जाती है और यह नियम है कि अदा की गई राशि का भुगतान करना ही होगा। इस तरह, संबंधित वाहन मालिक को बिना सुनवाई के चालान में राशि अंकित कर सीधे दंडित किया जा रहा है। सुनवाई किए बिना दंड देना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी एक निर्णय में कहा है कि बिना सुनवाई का अवसर प्रदान किए, किसी भी व्यक्ति को दंडित नहीं किया जाना चाहिए।
यातायात महासंघ ने यह भी कहा कि चालान की प्रतियां मोबाइल और घर पर भेजी जा रही हैं और संबंधितों को बार-बार संदेश देकर चालान अदा करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इससे यात्री वाहनों के आपरेटर ही नहीं बल्कि आम लोग भी मानसिक और आर्थिक दबाव में आ रहे हैं। तुरंत चालान पटाने की इस प्रक्रिया का सायबर ठग भी दुरुपयोग कर रहे हैं और फर्जी लिंक से लोगों के खातों से पैसे निकलने की शिकायतें भी आने लगी हैं।
यातायात महासंघ के अध्यक्ष अनवर अली और पदाधिकारियों ने विभिन्न परिवहन नियमों का हवाला देते हुए कहा कि किसी में भी ई-चालान जारी करने का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। पदाधिकारियों ने बयान में कहा कि सिर्फ रायपुर और छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में ई-चालान की प्रक्रिया तुरंत बंद की जानी चाहिए। इस संबंध में स्पष्ट नियमावली बनाई जानी चाहिए, जिसमें स्पष्ट हो कि बिना सुनवाई के किसी को भी दंडित नहीं किया जाए। यही नहीं, फर्जी वेबसाइट और लिंक पर सख्ती से रोक लगाई जाए, ताकि ठगी रोकी जा सके।



