छत्तीसगढ़ के 7 हजार परिवारों के 32 हजार लोग घबराकर बस गए तेलंगाना-आंध्रप्रदेश में… नक्सलियों का डर खत्म, अब इनकी वापसी की कोशिशें शुरू
छत्तीसगढ़ में बस्तर के करीब 7 हजार परिवारों के 32 हजार लोगों ने पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश छोड़ दिया और तेलंगाना तथा आंधप्रदेश के गांवों में रह रहे हैं। ये सरकारी आंकड़े हैं, वास्तविक संख्या ज़्यादा भी हो सकती है। जिन जिलों बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा से इतने परिवार विस्थापित हुए, अब उनका डर यानी नक्सल आतंक छत्तीसगढ़ से लगभग खत्म हो चुका है। इसलिए शासन ने ऐसे परिवारों की घरवापसी की कोशिश शुरू कर दी है। रायपुर स्थित मंत्रालय में आज एसीएस होम मनोज कुमार पिंगुआ की अध्यक्षता में बड़ी बैठक हुई है। इस बैठक में बस्तर कमिश्नर, आईजी तथा कई कलेक्टर वर्चुअली जुड़े थे। बैठक में छत्तीसगढ़ से गए ऐसे ही परिवारों को वापस लाने पर मंथन हुआ है।

बैठक में बताया गया कि जिला दंतेवाड़ा, सुकमा एवं बीजापुर के लोग तेलंगाना एवं आन्ध्रप्रदेश राज्य में प्रवासित हो गए हैं। बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा से तेलंगाना राज्य के 467 ग्राम में 4345 परिवार के 19709 व्यक्ति रह रहे हैं। इन्हीं जिलों से आंध्रप्रदेश राज्य के 184 ग्राम में 2594 परिवार के 11389 व्यक्ति प्रवासित है। इस प्रकार, दंतेवाड़ा, सुकमा एवं बीजापुर के 667 ग्राम से तेलंगाना एवं आंध्रप्रदेश राज्य के 651 ग्राम में 6939 परिवार के 31098 व्यक्ति रह रहे हैं। बैठक में एक माह के भीतर तीनो जिलों का सर्वे कर प्रवासित परिवारों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। एसीएस पिंगुआ ने कलेक्टर दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा से कहा है कि वे अपने-अपने जिलों से अन्य प्रांतों में प्रवासित लोगों के बारे में उनके मूल ग्राम एवं निवास स्थान से आवश्यक जानकारी तैयार कर लें। जिससे पुनर्वास योजना बनाने आसानी होगी। इसी तरह से पुनर्वास योजना बनाने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को निर्देशित दिए गए है कि वे शीघ्र ही अपने-अपने विभागों के नोडल अधिकारी नियुक्त कर दें, जिससे शीघ्र पुनर्वास योजना बनाने में आसानी होगी।



