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अमित जोगी हत्या के मामले में दोषी करार… जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट का अहम फैसला… तीन सप्ताह में सरेंडर का आदेश

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को दोषी करार दिया है। अमित को रायपुर की विशेष अदालत 2007 में दोषमुक्त किया था और अब 20 साल बाद ये अहम फैसला आया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने अमित जोगी को हत्या में दोषी करार देते हुए तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण का आदेश दिया है। ताज़ा फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित जोगी ने इसे अप्रत्याशित बताया और कहा कि उन्हें इस मामले में फंसाया गया है।

यह मामला 2003 का है, जब तत्कालीन राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के कोषाध्यक्ष रामावतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय छत्तीसगढ़ में राजनीतिक माहौल बेहद गरमाया हुआ था और अजीत जोगी मुख्यमंत्री थे। जग्गी की हत्या के तार सीधे तौर पर राजनीतिक साजिश से जोड़े गए थे। सीबीआई ने अपनी जांच में तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र अमित जोगी समेत 31 लोगों को आरोपी बनाया था।  हालांकि, 2007 में रायपुर की एक विशेष सीबीआई अदालत ने साक्ष्यों के अभाव का हवाला देते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि 28 अन्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद से इस मामले में खामोशी रही, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट में पिछले महीने सुनवाई हुई थी।

इधर, फैसले के बाद अमित जोगी ने सोशल मीडिया पर यह पोस्ट की- आज माननीय उच्च न्यायालय ने मेरे विरुद्ध CBI की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया- बिना सुनवाई का अवसर दिए। मुझे खेद है कि जिस व्यक्ति को अदालत ने दोषमुक्त किया था, उसे बिना सुनवाई का एक भी अवसर दिए दोषी करार दिया गया। यह अप्रत्याशित है. अदालत ने मुझे 3 सप्ताह के अंदर सरेंडर करने का समय दिया है. मुझे लगता है कि मेरे साथ गंभीर अन्याय हुआ है. मुझे पूरा विश्वास है कि सर्वोच्च न्यायालय से मुझे न्याय अवश्य मिलेगा।

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