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सुकमा में सरेंडर 35 नक्सली बने राजमिस्त्री… इनमें 20 पुरुष और 15 महिलाएं… साय सरकार की पुनर्वास नीति का असर

कुछ माह पहले तक धुर नक्सल प्रभावित जिले सुकमा में सरेंडर नक्सलियों के पुनर्वास की साय सरकार की कोशिशों के चौंकाने वाले नतीजे आ रहे हैं। वहाँ पुनर्वास केंद्र में रह रहे 35 आत्मसमर्पित नक्सली अब राजमिस्त्री बन गए हैं। इसे सीएम विष्णु साय की संवेदनशील सोच और स्पष्ट मंशा से बनाई गई पुनर्वास नीति का असर माना जा रहा है।

सरेंडर नक्सलियों को यह प्रशिक्षण जिला प्रशासन और एसबीआई आरसेटी के संयुक्त सहयोग से संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में 15 महिलाएं और 20 पुरुष शामिल हैं। इन्हें नींव निर्माण, ईंट चिनाई, प्लास्टर कार्य, छत ढलाई, गुणवत्ता मानक का व्यवस्थित और चरणबद्ध प्रशिक्षण दिया गया है ताकि ये किसी भी निर्माण कार्य में दक्षता के साथ काम कर सकें। यह पहल केवल रोजगार प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसमर्पित युवाओं के जीवन को नई दिशा देने का सशक्त माध्यम बन रही है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ये युवा प्रधानमंत्री आवास योजना(ग्रामीण )के तहत जिले में अधूरे और नए आवासों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। इससे एक ओर उन्हें स्थायी और सम्मानजनक रोजगार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही कुशल राजमिस्त्रियों की कमी भी दूर होगी।

सीएम विष्णु देव साय ने इस पहल को लेकर कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार संवाद, संवेदना और विकास के माध्यम से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। आत्मसमर्पित युवाओं को हुनर, रोजगार और सम्मान देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना राज्य की पुनर्वास नीति का मूल उद्देश्य है। सुकमा जिले में चल रहा आत्मसमर्पित युवाओं को रोजगार मूलक कार्यों से जोड़ने का यह प्रयास इस बात का प्रमाण है कि संवेदनशील प्रशासन, भरोसे और विकासपरक योजनाओं के जरिए हिंसा के रास्ते पर भटके युवाओं को नई पहचान और बेहतर भविष्य दिया जा सकता है। यही पुनर्वास की असली सफलता और स्थायी शांति की मजबूत नींव है।

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