पीएम मोदी से मिले सीएम साय, छत्तीसगढ़ में विकास का दिया प्रेजेंटेशन… राजनांदगांव यूरिया समेत तीन बड़े प्रोजेक्ट के लिए पीएम से मांगी मदद

आज 31 जुलाई की अहम खबर ये है कि पीएम नरेंद्र मोदी से छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने नई दिल्ली में मुलाक़ात की है और पीएम के सामने छत्तीसगढ़ के विकास और ‘बस्तर विजन’ पर विस्तार से प्रेजेंटेशन दिया है। सीएम ने पीएम मोदी से छत्तीसगढ़ के तीन बड़े प्रोजेक्ट-राजनांदगांव में 10,500 करोड़ रुपए की गैस आधारित यूरिया परियोजना, प्रदेश में करीब 500 गांवों में स्थायी ग्रिड कनेक्टिविटी और ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की स्थापना के लिए सहयोग भी मांगा है। सीएम ने प्रधानमंत्री के समक्ष बदलते बस्तर का रोडमैप प्रस्तुत करते हुए कहा कि शांति और विश्वास के साथ बस्तर अब विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ और ‘बस्तर मुन्ने’ से 5,542 गांवों के लगभग 39 लाख लोगों तक शासन की योजनाएं पहुंच रही हैं। सीएम साय ने प्रधानमंत्री को वर्ष 2027 में रायपुर में प्रस्तावित ‘लखपति दीदी सम्मेलन’ में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया है।
सीएम साय ने राजनांदगांव में प्रस्तावित लगभग 10,500 करोड़ की गैस आधारित यूरिया परियोजना को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने पीएम मोदी को बताया कि परियोजना के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध करा दी गई है तथा राज्य सरकार के स्तर की आवश्यक स्वीकृतियां भी पूरी की जा चुकी हैं। इस परियोजना के स्थापित होने से छत्तीसगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों के किसानों के लिए उर्वरक की उपलब्धता और बेहतर होगी।
इसी तरह, सीएम ने बस्तर सहित संवेदनशील क्षेत्रों के ऐसे 461 गांवों का विषय भी प्रधानमंत्री मोदी के समक्ष रखा, जहां पूर्व में सुरक्षा एवं भौगोलिक कारणों से विद्युत ग्रिड पहुंचाना संभव नहीं हो पाया था और वर्तमान में ऑफ-ग्रिड बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने इन गांवों को स्थायी विद्युत ग्रिड से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार से विशेष सहयोग का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रायपुर अथवा बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) की स्थापना के प्रस्ताव पर सकारात्मक पहल का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर और अन्य जनजातीय क्षेत्रों में औषधीय वनस्पतियों एवं पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान की समृद्ध विरासत है। राष्ट्रीय स्तर के आयुर्वेद संस्थान की स्थापना से चिकित्सा, अनुसंधान, शिक्षा और औषधीय वनस्पतियों पर आधारित स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए नई संभावनाएं विकसित होंगी।



