कमल विहार की सड़कों को बाइपास बनाकर रौंद रहे हैं हैवी ट्रक… सड़कें टूट रही हैं, कार-बाइक वाले भी खतरे हैं… पुलिस के सामने घुसते हैं ट्रक, सब मौन

छत्तीसगढ़ और संभवतः सेंट्रल इंडिया की सबसे बड़े कालोनी का कांसेप्ट भाजपा की पूर्ववर्ती सरकार में आया, डेवलपमेंट भी उसी दौरान हुआ था। अब भी भाजपा की सरकार है, लेकिन रायपुर प्रशासन, पुलिस, आरडीए और नगर निगम ने इस विशाल कालोनी को अपने हाल पर छोड़ दिया है। दिक्कतें तो बहुत हैं, लेकिन पिछले एक साल से कालोनी पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। वह है इसकी मेन रोड्स पर हैवी ट्रक्स का। नया धमतरी और पुराना धमतरी रोड के लिए कमल विहार की मेन रोड को हैवी ट्रकों का बाइपास बना दिया गया है। यही नहीं, आसपास के ट्रांसपोर्टर इन सड़कों का इस्तेमाल पार्किंग के लिए करने लगे हैं। डूमरतराई से डूंडा के बीच कमल विहार मेन रोड की दिनभर गुजरते ओवरलोड ट्रकों ने धज्जियां उड़ानी शुरू कर दी हैं। दोनों मुहानों पर ट्रैफिक के साथ-साथ जिला पुलिस भी रहती है। इसके बावजूद ये ट्रक न सिर्फ घुसते हैं, बल्कि रोड्स पर पार्क भी किए जा रहे हैं। इस इलाके के पुलिस अफसरों को यह जानकारी दी जाए, तो उनका रिएक्शन आदतन बेहद ठंडा रहता है- अरे, चलो देखते हैं…। जाहिर है, देखते हैं का रायपुर में मतलब यही है कि कभी नहीं देखना है।

करीब साढ़े तीन किमी लंबी कमल विहार मेन रोड पूरी कालोनी की लाइफलाइन है। कालोनी को शत-प्रतिशत से ज्यादा लोग इस मेन रोड के साथ-साथ दो और पैरलल रोड्स का उपयोग कर रहे हैं। ये सड़कें वन-वे हैं, सुरक्षित हैं और चौड़ी भी हैं। लेकिन जब से इनपर ट्रकों की धड़ल्ले से एंट्री शुरू हुई है, ये सड़कें संकरी लगने लगी हैं, टूट रही हैं और खतरनाक होने लगी हैं। कमल विहार मेन रोड पर ट्रकों की एंट्री के दो प्वाइंट हैं। धमतरी रोड से कमल विहार में ट्रकों की एंट्री सबसे ज्यादा डूमरतराई, फिर लालपुर ओवरब्रिज और इसके आगे सेक्टर-5 की रोड से होती है और फिर ट्रक धड़ल्ले से मेन रोड पर आ जाती हैं। पुराना धमतरी रोड से ट्रक बोरिया और डूंडा के बीच की तीन रोड्स से कमल विहार में घुस रहे हैं। मेन रोड के दोनों ओपनिंग पाइंट्स पर दिनभर पुलिस रहती है, रात में 112 की गाड़ियां रहती हैं। सुबह हो, शाम हो या रात, इनके सामने से ट्रक कमल विहार में दाखिल होते हैं और क्रास होने के अलावा पार्क भी किए जा रहे हैं। इस रोड के बीचोबीच मेन चौराहे के आसपास तथा सर्विस रोड्स पर दर्जनों ट्रकों ने जैसा अड्डा बना लिया है, जबकि ये प्योर रेसिडेंशियल एरिया है। लोगों को तकलीफ हो रही है, लेकिन प्रशासन और पुलिस, किसी का ध्यान नहीं है। सड़कें टूट रही हैं और मेंटेनेंस के नाम पर गेंद आरडीए और नगर निगम के पाले में भटक रही है। लोगों का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकारों में इस कालोनी पर अच्छी तरह से ध्यान दिया गया, लेकिन इस बार कालोनी की कुछ ज्यादा ही उपेक्षा हुई है। इस बारे में राजनीति से जुड़े लोग भी चुप ही हैं।



