पीएम मोदी ने मन की बात में छत्तीसगढ़ के “कोरिया मॉडल” को सराहा… जानिए क्या है बरसाती पानी बचाने का यह मॉडल

पानी बचाने के मामले में छत्तीसगढ़ का “कोरिया मॉडल” देशभर में आज रविवार को अचानक चर्चा में आ गया, जब रेडियो कार्यक्रम मन की बात में पीएम नरेंद्र मोदी ने इसकी सराहना कर दी। पीएम ने कोरिया मॉडल को जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण का प्रेरक उदाहरण बताया। इस तारीफ़ से छत्तीसगढ़ की गूंज देशभर में है। सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि कोरिया जिले का प्रयास राष्ट्रीय उदाहरण बना है और जल संरक्षण को जनभागीदारी से सशक्त करना हमारा संकल्प है। द स्तम्भ आपको बता रहा है कि यह कोरिया मॉडल क्या है, किस तरह काम कर रहा है।
-कोरिया जिले में जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देते हुए “कैच द रेन” तथा “आवा पानी झोंकी” अभियान चलाया गया। कोरिया जिले में लगभग 1370 मिमी वार्षिक वर्षा होने के बावजूद भू-आकृतिक परिस्थितियों के कारण जल का तीव्र बहाव होता था, जिससे भूजल पुनर्भरण सीमित था। इसलिए जल संरक्षण का यह अभियान शुरू किया गया। जिले के किसानों ने अपनी भूमि का 5% भाग छोटी सीढ़ीदार जल संरचनाओं के लिए समर्पित किया। साथ ही सोखता गड्ढे और मनरेगा के अंतर्गत संरचनाएं बनाईं गईं। इससे जिले में कुल लगभग 2.8 MCM (28 लाख घन मीटर) जल का भूजल में पुनर्भरण हुआ। यह जल मात्रा लगभग 230–235 (12000 m³/ तालाब ) बड़े तालाबों के बराबर और 1800 से अधिक ( 1500 m³/ डबरी ) डबरियों के बराबर है।
भूजल स्तर में सुधार की हुई पुष्टि
CGWB की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में कोरिया जिले के भूजल स्तर में 5.41 मीटर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। यह इस मॉडल की प्रभावशीलता को दर्शाती है। इसी मॉडल में इस साल 20,612 से अधिक जल संरक्षण कार्य पूर्ण/प्रगति पर हैं। इनमें 17,229 सामुदायिक कार्य तथा 3,383 मनरेगा आधारित संरचनाएँ शामिल हैं।



