छत्तीसगढ़ में मानव तस्करी का बड़ा रैकेट फूटा… यहाँ से ओडिशा तक 10 जगह छापे… नाबालिगों की तस्करी, शोषण के सबूत मिले, डेढ़ करोड़ कैश भी जब्त
छत्तीसगढ़ के महासमुंद में पुलिस ने मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी से जुड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और छत्तीसगढ़ व ओडिशा में फैले नेटवर्क के करीब 10 ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की है। आरोपियों के ठिकानों से ₹1.48 करोड़ से ज्यादा कैश (1,48,54,750 रुपये) बरामद किए गए हैं।
पुलिस ने बताया कि छापेमारी में भारी मात्रा में अवैध परिवहन से जुड़े दस्तावेज, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड (ATM) और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश तब हुआ जब एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की के गर्भवती होने की सूचना मिली। जांच में पता चला कि पीड़ित नाबालिग को उसके परिवार के साथ उत्तर प्रदेश के एक ईंट भट्ठे पर काम करने भेजा गया था, जहां एक जेसीबी चालक ने उसका दैहिक शोषण किया। जब पुलिस ने इस मामले की गहराई से जांच शुरू की, तो महासमुंद और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय एक बड़े गिरोह का पता चला। यह सिंडिकेट गरीब मजदूरों को भारी एडवांस (अग्रिम कर्ज) का लालच देकर अपने जाल में फंसाता था और फिर उन्हें दूसरे राज्यों के ईंट भट्ठों में बंधुआ मजदूरी के लिए भेज देता था।
पुलिस की इस रेड में श्रमिक दलाली के मामले में चर्चित अजगर उर्फ जगत कुमार गुप्ता, लता संवर और ओडिशा निवासी मुकेश चंद्राकर जैसे बड़े नामजद दलालों के ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस गिरोह द्वारा नाबालिगों की तस्करी, बाल मजदूरी और बच्चियों के यौन शोषण किए जाने के भी पुख्ता साक्ष्य पुलिस के हाथ लगे हैं।



