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छत्तीसगढ़ विधानसभा में कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव… अंतिम दिन 17 जुलाई को चर्चा… प्रश्नकाल में वेदांता हादसे पर भारी हंगामा
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान आज मंगलवार 14 जुलाई को मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की ओर से सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सदन के पटल पर पेश कर दिया गया। विधानसभा की कार्यसूची और तय नियमों के अनुसार, इस अविश्वास प्रस्ताव पर सत्र के अंतिम दिन यानी 17 जुलाई को सदन में विस्तृत चर्चा होगी। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद से यह प्रदेश के इतिहास का 10वां अविश्वास प्रस्ताव है।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक दल ने सरकार को कई मोर्चों पर घेरने के लिए यह प्रस्ताव लाया है। विपक्ष प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था और अपराधों के ग्राफ पर आक्रामक है। खरीफ सीजन में खाद-बीज और ग्रामीण इलाकों में बिजली सप्लाई पर भी कांग्रेस मुखर है।नकटी गांव में हुई कार्रवाई और बेदखली का मुद्दा भी कांग्रेस उठा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस अविश्वास प्रस्ताव का महत्व गणितीय से ज्यादा रणनीतिक और राजनीतिक है। सदन में भाजपा के पास 54 विधायक हैं, जिससे सरकार को पूर्ण बहुमत प्राप्त है और संख्या बल में मजबूत है। दूसरी ओर कांग्रेस (विपक्ष) के पास 35 विधायक हैं। इस प्रकार, अविश्वास प्रस्ताव पर फिलहाल सरकार पर कोई संकट नज़र नहीं आ रहा है। लेकिन 17 जुलाई को होने वाली इस बहस के दौरान सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिलेगी।
इससे पहले, सकती के वेदांता प्लांट में हादसा जिसमें 25 लोगों की जान गई, को लेकर विपक्षी कांग्रेस के सदस्यों ने आज प्रश्नकाल के दौरान सदन में भारी हंगामा किया है। विपक्षी सदस्य वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल पर कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे।



