छत्तीसगढ़ में एंटी पेपरलीक फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट खोलनी होगी… संसद में पेश हुए विधेयक में यह व्यवस्था
संसद के मानसून सत्र के छठे दिन, 27 जुलाई को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को लोकसभा में पेश कर दिया गया। इस बिल के तहत छत्तीसगढ़ समेत हर राज्य में पेपर लीक मामले में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही 2 महीने के भीतर जांच और चार्जशीट के 3 महीने के भीतर ट्रायल पूरा करना अनिवार्य होगा। बहरहाल, नीट (NEET) पेपर लीक मामले पर विपक्ष के भारी हंगामे के कारण आज दोनों सदनों की कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा।
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026’ पेश किया। इस नए संशोधन बिल में व्यक्तिगत अपराधियों के लिए 5 से 10 साल की जेल और ₹50 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है। संगठित अपराधों (रैकेट) के लिए न्यूनतम ₹10 करोड़ का जुर्माना तय किया गया है। इसके अलावा कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026’ और ‘परिसीमन (Delimitation) विधेयक, 2026’ भी चर्चा के एजेंडे में शामिल रहे।
नीट और छात्र आंदोलन पर विपक्ष ने 20 जुलाई को छात्रों के विरोध मार्च के दौरान पुलिस की कथित बर्बरता और लाठीचार्ज के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने नियम 267 के तहत इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग की, जिसे स्वीकार न किए जाने पर भारी नारेबाजी हुई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हंगामे को शांत करने और पेपर लीक बिल पर 6 घंटे की लंबी चर्चा की पेशकश की, लेकिन सहमति नहीं बनी। फिर लोकसभा को शाम 5 बजे तक और राज्यसभा को शाम 5:15 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।



