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छत्तीसगढ़ विधानसभा में सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पेश, ये अब तक का 10वाँ… नेता प्रतिपक्ष महंत ने साय सरकार को घेरा… सीएम-मंत्रियों समेत 40 सदस्य चर्चा में शामिल, रात तक फैसला

छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत की अगुवाई में विपक्षी दल कांग्रेस ने विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया है। डॉ महंत ने अविश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए लंबे संबोधन में “136 हफ्ते 136 घोटाले” की थीम पर सरकार को घेरा है। स्पीकर डॉ रमन सिंह की अनुमति से सीएम विष्णुदेव साय, सभी मंत्री, पूर्व सीएम भूपेश बघेल और विपक्ष को मिलकर 40 सदस्यों को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा करने की अनुमति दी है। विपक्ष के आरोपों पर सत्तापक्ष के सदस्यों ने भी तीखे तेवर दिखाए हैं। शाम 4 बजे तक 5 सदस्य चर्चा में हिस्सा ले चुके हैं। इस लिहाज़ से आज अंतिम दिन विधानसभा की कार्यवाही देर शाम तक चलने की संभावना है।

राज्य गठन के बाद छत्तीसगढ़ विधानसभा के इतिहास का यह 10वां अविश्वास प्रस्ताव है। अविश्वास प्रस्ताव पेश किए जाने के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस देखने को मिली है। सीएम विष्णुदेव साय भी चर्चा के दौरान डटे हुए हैं। अविश्वास प्रस्ताव में कांग्रेस को घेरने के लिए सरकार ने नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई, राज्य में कानून-व्यवस्था, अपराध और बढ़ती महंगाई, धान खरीदी केंद्रों में शॉर्टेज (कमी), ‘महतारी वंदन योजना’ में महिलाओं के नाम कटने और कथित फर्जी ग्रामसभा प्रस्तावों के आधार पर उद्योगों की स्थापना जैसे मुद्दे हैं।

अगर अविश्वास प्रस्ताव पर देर शाम वोटिंग के हालत बने तो संख्या बल के लिहाज से वर्तमान भाजपा सरकार तरह सुरक्षित है। भाजपा (सत्ता पक्ष) के 54 विधायक हैं। कांग्रेस (विपक्ष) के 35 विधायक और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का 01 विधायक है। जानकारों के मुताबिक संख्याबल साय सरकार के पक्ष में होने के कारण इस अविश्वास प्रस्ताव का मकसद सरकार गिराना नहीं, बल्कि सदन के भीतर सरकार के कामकाज की कमियों को उजागर करना हो सकता है।

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