छत्तीसगढ़ में गांजे के पौधे मिल जाते हैं, अफीम का पहली बार मिला… पुलिस दिन-रात लगी, कई विभाग जुटे तब बना केस… आज रिमांड के बाद आरोपी खोलेंगे राज

दुर्ग पुलिस की कोर टीम… इनकी हो रही प्रशंसा

छत्तीसगढ़ में अफ़ीम की खेती का पकड़ा जाना किसी असाधारण क्राइम से कम नहीं है। यहाँ खेतों में गांजे के पच्चीस-पचास पौधे पकड़े जा चुके हैं, पर पुलिस ने अफीम का खेत ख़ुद पहली बार देखा। पहले दिन तो किसी को समझ नहीं आया कि कार्रवाई कैसे होगी। फिर पुलिस अफसरों ने न सिर्फ पौधे उखाड़े, बल्कि देशभर में हुई ऐसी कार्रवाई का अध्ययन किया। राजस्व अफसरों को खेत का एक एक इंच हिस्सा नपवाने में पूरा दिन लगा। एसएसपी विजय अग्रवाल ने बताया कि इस केस में पुलिस ने नेक्स्ट लेवल की उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया है, इसलिए सबको पुरस्कृत करने की अनुशंसा होगी। इधर, पुलिस ने आज कोर्ट में आरोपियों की रिमांड की अर्जी लगाई है। आरोपियों से पूछताछ के बाद स्पष्ट होगा कि अफ़ीम के पौधे कहाँ से आए, अफीम कैसे बेचते वगैरह। हालांकि प्रारंभिक जाँच में ही केस राजस्थान से जुड़ गया है।
अफीम की खेती का केस तैयार करने में एएसपी सुखनंदन राठौर, एएसपी मणिशंकर चन्द्रा, डीएसपी हर्षित मेहर, एसडीओपी धमधा चित्रा वर्मा, सीएसपी भिलाई नगर सत्य प्रकाश, थाना पुलगांव पुलिस, जेवरा–सिरसा चौकी पुलिस, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL), आबकारी विभाग एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

कलेक्टर दुर्ग अभिजीत सिंह के निर्देशानुसार अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) दुर्ग, तहसीलदार दुर्ग एवं अतिरिक्त तहसीलदार द्वारा मौके पर पहुंचकर भूमि अभिलेखों की जांच की गई। जांच में ग्राम झेंझरी, तहसील दुर्ग स्थित खसरा नंबर 309 रकबा 80 डिसमिल तथा खसरा नंबर 310 रकबा 09 एकड़ 92 डिसमिल, कुल खसरा नंबर 02 रकबा 10 एकड़ 72 डिसमिल भूमि दर्ज पाई गई, जिसमे अफीम के पौधे लहलहा रहे थे।



