सट्टा किंगपिन सौरभ का छत्तीसगढ़ लाया जाना किसी बड़े राजनैतिक तूफ़ान का इशारा… ब्यूरोक्रेसी पर भी नज़र आ सकता है “काली आंधी” का असर

महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर का कल 2 नवंबर को रायपुर लाया जाना छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिए कम बड़ा भूचाल नहीं है। 6,000 करोड़ रुपए के इस कथित घोटाले का केंद्र छत्तीसगढ़ रहा है। इससे राज्य के राजनीतिक गलियारों में करीब चार साल से हलचल मची है, जो अब और तेज हो सकती है।
सौरभ ने पहले बयान दिया था कि यदि उसे सुरक्षा दी जाए तो वह राजनीतिक कनेक्शन, पैसों के लेन-देन और पूरे नेटवर्क का राज खोलने को तैयार है। यह बयान थोड़ा पुराना ज़रूर है, लेकिन सीबीआई और ईडी की अब होने वाली पूछताछ में सौरभ जिसका भी नाम उजागर करेगा, उसकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हो सकता है कि कुछ बड़े चेहरे भी जाँच के दायरे में आ जाएं। महादेव एप केस में पिछले चार साल में छत्तीसगढ़ में सिर्फ नेताओं के नाम नहीं सुने, बल्कि अफसरों की चर्चाएं भी हुई हैं। इसलिए यह चर्चाएं भी चल रही हैं कि खलबली राजनीति के साथ ब्यूरोक्रेसी में भी मचेगी।
यह मामला छत्तीसगढ़ विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान भी एक बड़ा राजनीतिक हथियार रहा है। अब चंद्राकर के रायपुर आने से दोनों प्रमुख दलों के बीच जुबानी जंग और तेज हो जाएगी। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और मोदी सरकार की बड़ी सफलता के रूप में पेश कर रही है। जबकि कांग्रेस लगातार आरोप लगा रही है कि सट्टा ऐप अभी भी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, जो जांच पर सवाल खड़े करता है।
छत्तीसगढ़ में भविष्य के राजनीतिक घटनाक्रमों पर सौरभ चंद्राकर के यहाँ लाए जाने का सीधा असर पड़ेगा। यदि उसके बयानों के आधार पर कुछ गिरफ्तारियां या छापेमारी होती है, तोसंबंधित दल l के लिए जनता के बीच अपनी साख बचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। चर्चा यह भी है जनता के बीच “भ्रष्टाचार, सट्टेबाजी या राजनैतिक बदले” का नैरेटिव सेट करने में जिस भी दल को कामयाबी मिलेगी, उसे राजनीतिक रूप से फायदा हो सकता है।



