ये तो “विजन” नहीं !!! पैरी नदी का पुल 6 साल से अधूरा… बच्चे 20 फीट की खतरनाक सीढ़ी चढ़ते हैं, फिर गड्ढे-सरिया से बचकर पार करते हैं, ऐसा रोज़ दो बार
गरियाबंद के मैनपुर में देहारगुड़ा और खामभाठा के बीच पैरी नदी पर बन रहे करीब 300 मीटर लंबे इस अधूरे पुल के वीडियो लोकल सोशल मीडिया पर वायरल हैं। स्कूली बच्चों को इस अधूरे पुल को दिन में दो बार पार करने की मशक्कत करते देखना ही डराने वाला है। लोगों का कहना है कि पुल करीब 6 साल से अधूरा है। द स्तम्भ इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता, लेकिन यह मैनपुर इलाके में हज़ारों मोबाइल फ़ोन पर व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टा पर चल रहा है और ताज़ा है क्योंकि बारिश से पैरी नदी उफान पर आने से यह दृश्य बनता है। नदी चढ़ने पर स्कूली बच्चे इस अधूरे पुल के पिलर से लगी करीब 20 फीट ऊंची लोहे की सीढ़ी के सहारे जान जोखिम में डालकर चढ़ते हैं। उसके बाद इस पुल को पार करते हैं, जिसे ढालने के लिए कहीं लोहा बंधा है, तो कहीं नीचे की प्लाई ही गायब है और ऊपर से सीधे पैरी की तेज धार में गिरने का खतरा है। जिन्होंने बरसात में पैरी नदी देखी है, इसके बहाव का फोर्स वही जान सकते हैं। बहरहाल, एक बार इसे पार करने के बाद इतनी ही मशक्कत करते हुए लौटते हैं, यानी यह सब दिन में दो बार।
पीडब्लूडी के राजधानी में बैठे संवेदनशील आला अफसरों को लोकल अफसरों से इस पुल की जानकारी लेनी चाहिए कि स्थानीय तौर पर वीडियो के साथ जो बातें फैली हैं, उनमें कितनी सच्चाई है। अगर पुल वास्तव में पांच-छह साल से किसी भी महान कारण से अधूरा है, तो यह बात “नाकाबिले-बर्दाश्त” के तौर पर ट्रीट होनी चाहिए।
बहरहाल, इस वीडियो के साथ छत्तीसगढ़ उर्दू अकादमी के अध्यक्ष इदरीस गांधी ने सीएम विष्णुदेव साय को पत्र लिखा है और सीएम से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि पुल का निर्माण पूरा होने तक स्कूली बच्चों के लिए तत्काल सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की जाए।



