बीजापुर में 20 साल से बंद कोरंडम खदान सरकार ने खोली… माणिक (Ruby) और नीलम (Saffire) ही है कोरंडम… यह बहुमूल्य रंगीन-पारदर्शी रत्न हीरे के बाद सबसे कठोर
छत्तीसगढ़ के बीजापुर में कुचनूर (कोचनूर) कोरंडम खदान में 20 साल बाद माइनिंग फिर शुरू हो गई है। कुछ दिन पहले यानी अगस्त के आख़िरी हफ़्ते में सरकार ने इस खदान को खोलने के लिए ज़रूरी कदम उठाए थे। ही बहुमूल्य रत्न माणिक (Ruby) और नीलम (Saffire) है। जब कोरंडम पारदर्शी और रंगीन रूप में मिलता है, तो इसे दुनिया के सबसे महंगे रत्नों में गिना जाता है। क्रोमियम धातु की मौजूदगी के कारण जब कोरंडम का रंग लाल हो जाता है, तो उसे माणिक कहा जाता है। इसी तरह लोहे और टाइटेनियम के कारण जब यह नीले या अन्य रंगों (पीला, हरा, गुलाबी) में मिलता है, तो इसे नीलम कहते हैं। कोरंडम एल्यूमीनियम ऑक्साइड (Al₂O₃) का एक प्राकृतिक क्रिस्टलीय खनिज रूप है, जो प्राकृतिक पदार्थों में हीरे (Hardness 10) के बाद दुनिया का दूसरा सबसे कठोर खनिज है। शुद्ध रूप में कोरंडम पूरी तरह से रंगहीन और पारदर्शी होता है, लेकिन प्रकृति में अलग-अलग धातुओं की मिलावट (अशुद्धियों) के कारण यह कई खूबसूरत रंगों में मिलता है और बहुमूल्य हो जाता है।

कोरंडम माइनिंग के लिए मंगलवार को सीएम विष्णुदेव साय की मौजूदगी में छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (CMDC) और रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के बीच एक विशेष समझौता (MoU) हुआ है।स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग: नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन के तहत इस कीमती रत्न (कोरंडम) का न सिर्फ खनन किया जाएगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर ही इसकी कटिंग, पॉलिशिंग और वैल्यू एडिशन भी किया जाएगा।
कोरंडम की खदान सुरक्षा और अन्य कारणों से लंबे समय से बंद पड़ी थी, जिसे अब दोबारा शुरू किया जा रहा है। खदान को दोबारा खोलने की प्रक्रिया को लेकर स्थानीय राजनीति भी गरमाई हुई है। सरकार ने खदान खोलने के फैसले को आत्मनिर्भर भारत और स्थानीय रोजगार की दिशा में बड़ा कदम बताया है। वहीं, विपक्षी कांग्रेस का आरोप है कि खदान को निजी हाथों में सौंपने की कोशिश की जा रही है।



