महादेव सट्टा एप का नंबर-2 रवि उप्पल दुबई में गिरफ्तार… भारत लाया गया तो इस कांड से कनेक्टेड लोगों की मुसीबत डबल
महादेव ऑनलाइन सट्टा एप का को-प्रमोटर और सौरभ चंद्राकर के बाद नंबर-2 रवि उप्पल यूएई (दुबई) में गिरफ्तार कर लिया गया है। इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर हुई इस गिरफ्तारी के बाद CBI और ED उसे भारत लाने की कानूनी प्रक्रिया में जुट गई हैं। तीन दिन पहले, 1 नवंबर को इस सिंडिकेट के प्रमुख सौरभ चंद्राकर को भी ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लाया जा चुका है।
रवि उप्पल पर मुख्य रूप से अवैध सट्टेबाजी सिंडिकेट चलाने, धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग (हवाला नेटवर्क) के गंभीर आरोप हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच के अनुसार रवि उप्पल पर महादेव ऐप के जरिए कमाए गए करोड़ों रुपये के अवैध सट्टेबाजी के पैसे को विभिन्न चैनलों के माध्यम से ट्रांसफर करने और सैकड़ों करोड़ रुपये के कथित हवाला नेटवर्क को संचालित करने का मुख्य आरोप है। जांच एजेंसियों का मानना है कि राजनेताओं और नौकरशाहों (officers) के साथ संपर्क बनाए रखने और अवैध कमाई को उन तक पहुंचाने की मुख्य जिम्मेदारी रवि उप्पल के पास ही थी।
दुबई से इस तरह लाया जा सकता है:-
भारत और दुबई या संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच प्रत्यर्पण संधि (Extradition Treaty) है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA), गृह मंत्रालय और जांच एजेंसियों (ED/CBI) के सहयोग से यूएई सरकार को रवि उप्पल के प्रत्यर्पण के लिए एक औपचारिक राजनयिक अनुरोध (Diplomatic Request) भेजेगा। भारत को दुबई की अदालत के सामने रवि उप्पल के खिलाफ पुख्ता सबूत, चार्जशीट और कोर्ट द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट पेश करने होंगे। वहाँ की अदालत इन सबूतों की समीक्षा करती है कि आरोपी पर लगे आरोप राजनीतिक नहीं बल्कि गंभीर आपराधिक/आर्थिक (जैसे ₹80,000 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी) हैं। अदालत की मंजूरी मिलने के बाद ही प्रत्यर्पण को हरी झंडी मिलेगी। अदालत के फैसले के बाद यूएई की सरकार (वहां का गृह या न्याय मंत्रालय) प्रत्यर्पण के अंतिम आदेश पर हस्ताक्षर करती है, जिसके बाद भारतीय टीम वहां जाकर आरोपी को हिरासत में लेगी।
रवि उप्पल ने भारत से भागने के बाद वानुआतु (Vanuatu) देश का पासपोर्ट हासिल कर लिया था, जिससे प्रत्यर्पण या निर्वासन की कानूनी लड़ाई थोड़ी पेचीदा हो जाती है। लेकिन भारतीय एजेंसियां यह साबित करेंगी कि वह मूल रूप से भारत (भिलाई, छत्तीसगढ़) का नागरिक है और उसने भारतीय नागरिकता नहीं छोड़ी है।



