आरएसएस प्रमुख डॉ भागवत के प्रवास में अहम फैसले… छत्तीसगढ़ में होंगे संघ के दो प्रांत, रायपुर-बिलासपुर… जनवरी से लागू हो सकता है बदलाव
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के 22 और 23 अक्टूबर के बिलासपुर प्रवास के दौरान संगठन के परिप्रेक्ष्य में छत्तीसगढ़ को दो प्रांत इकाइयों में बांटने के अहम बदलाव के संकेत मिले हैं। डॉ भागवत की उपस्थिति में इस बात पर गंभीर मंथन हुआ कि छत्तीसगढ़ प्रांत को दो प्रशासनिक हिस्सों में बांटा जा सकता है। इसके तहत रायपुर और बिलासपुर अलग-अलग विभाग बनाए जाएंगे। इस बदलाव के लागू होने से वर्तमान ‘प्रांत प्रमुख’ का पद समाप्त हो सकता है और नए पदों का सृजन किया जा सकता है। विभाजन के बाद रायपुर में 6 और बिलासपुर में 5 विभाग शामिल किए जा सकते हैं। यह सिस्टम तीन माह यानी जनवरी से लागू हो सकता है।
सरसंघचालक डॉ भागवत ने दो दिवसीय प्रवास के दौरान संघ के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और आनुषंगिक संगठनों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं। कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर (सरस्वती आवासीय महाविद्यालय) परिसर में आयोजित इन बैठकों का मुख्य एजेंडा संगठन विस्तार, शताब्दी वर्ष के कार्यों की समीक्षा और छत्तीसगढ़ संघ में बड़े प्रशासनिक बदलाव रहे।
अभी संघ का शताब्दी वर्ष (100 साल) चल रहा है, इसलिए बैठकों में इसके विस्तार पर खास जोर रहा। बैठकों में मुख्य शिक्षक, कार्यवाह, नगर, उपनगर और विभाग कार्यकारिणी से अब तक किए गए कार्यों की रिपोर्ट ली गई। शताब्दी वर्ष के माध्यम से संघ की शाखाओं को मैदानी स्तर और वनांचल (आदिवासी) क्षेत्रों तक मजबूत करने के लिए भावी कार्ययोजना तैयार की गई है।
डॉ. भागवत ने करीब 540 स्वयंसेवकों की मौजूदगी वाले बौद्धिक वर्ग को संबोधित किया और संगठन की ताकत को समझाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ केवल हिंदुओं के लिए नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के कल्याण के लिए काम करता है। उन्होंने हर स्वयंसेवक को टास्क दिया कि वे पहले किसी अनजान व्यक्ति से परिचय बढ़ाएं, फिर दोस्ती करें और अंत में उसे स्वयंसेवक बनाएं।



