डॉक्टरों के पदों पर प्रशासनिक अफसरों को बिठाने के ख़िलाफ़ आईएमए ने मोर्चा खोला… तर्क- ऐसी नियुक्तियों से इलाज का सिस्टम भी बुरी तरह प्रभावित
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं (DHS) और संचालनालय चिकित्सा शिक्षा (DME) के चिकित्सकीय प्रशासनिक पदों पर गैर-चिकित्सकीय (प्रशासनिक) अफसरों को बैठाने का विरोध लगातार तेज हो रहा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की राज्य इकाई ने आज सोमवार 26 अक्टूबर को जारी बयान में इस प्रवृत्ति को घातक बताते हुए कड़ा विरोध जताया है।
आईएमए ने प्रेस रिलीज़ जारी कर कहा कि स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से एक तकनीकी और क्लिनिकल क्षेत्र है। अस्पतालों के प्रबंधन, महामारी नियंत्रण, चिकित्सा शिक्षा और दवाओं व उपकरणों की खरीद जैसे संवेदनशील मामलों को एक डॉक्टर या चिकित्सा विशेषज्ञ ही बेहतर ढंग से समझ सकता है। किसी सामान्य प्रशासनिक अधिकारी (जैसे IAS या राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर) के पास इस तकनीकी ज्ञान का अभाव होता है।
आईएमए के अनुसार स्वास्थ्य संचालनालय में एडिशनल डायरेक्टर और अन्य वरिष्ठ पद मूल रूप से चिकित्सकीय संवर्ग के लिए निर्धारित हैं। इन पदों पर बाहरी या गैर-चिकित्सकीय अफसरों को बैठाने से विभाग के वरिष्ठ और अनुभवी डॉक्टरों के पदोन्नति (Promotion) के अधिकार छिन रहे हैं। आईएमए का तर्क है कि जब चिकित्सा नीतियों और प्रबंधन का निर्णय ऐसे अधिकारियों द्वारा लिया जाता है जिन्हें जमीनी डॉक्टरी समस्याओं का अनुभव नहीं होता, तो इससे नीतिगत देरी होती है और अंततः जनता को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।



