ANALYSIS : ओडिशा ने बस्तर में बाढ़ का कोहराम मचवाया… वहां के बांधों के कारण अब तक डूबा है बस्तर… डबल इंजन की परवाह सिर्फ “इधर” है, “उधर” नहीं
ओडिशा ने नदियों का पानी रोककर छत्तीसगढ़ में गर्मियों में वर्षों से संकट खड़ा रखा ही है, बरसात में इन्हीं बांधों से बेतहाशा पानी छोड़कर प्रदेश में बस्तर समेत कुछ क्षेत्रों में इस बार जलप्रलय के हालात पैदा कर दिए हैं। हाल में ओडिशा ने खातिगुड़ा बांध (Khatiguda Dam) से भारी मात्रा में पानी छोड़ा है, जिसके कारण बस्तर में बाढ़ ने भारी तबाही मचा रखी है। बांध के इसी पानी से बस्तर की जीवनदायिनी इंद्रावती नदी इतने उफान पर है कि जगदलपुर शहर और आस-पास के ग्रामीण इलाकों में जलप्रलय जैसे हालात बन गए हैं। बस्तर में साल 2010 के बाद पहली बार ऐसी भीषण बाढ़ देखने को मिली है। पानी बंटवारे पर छत्तीसगढ़ की वर्तमान विष्णुदेव साय सरकार समेत सभी सरकारें हमेशा ओड़िशा के प्रति संवेदनशील रही हैं। अब बारिश के अलावा ओडिशाजनित बाढ़ से छत्तीसगढ़ को भारी नुक़सान हुआ है। यहाँ तक कि सीएम साय समेत पूरी सरकार को बस्तर में बाढ़ से बिगड़े हालात और लोगों की जान बचाने पर ही फोकस करना पड़ गया है। लेकिन बस्तर में बाढ़ के लिए ओडिशा सरकार की तरफ़ से अब तक कोई सहानुभूति या खेद मीडिया के ज़रिए तो सामने नहीं आया।
अभी बस्तर के प्रमुख शहर जगदलपुर के निचले हिस्से में बाढ़ का पानी भर गया है। प्रशासन, SDRF, नगर सेना की टीमों और MI-17 हेलिकॉप्टर की मदद से अब तक 800 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। इसके अलावा करीब 4,798 पीड़ितों को राहत शिविरों में ठहराया गया है। ओडिशा के बांधों से छोड़े गए पानी का सबसे ज्यादा असर सीमावर्ती इलाकों में देखा गया है। बेलगांव जैसे क्षेत्रों में लोग अपने घरों की छतों पर शरण लेने को मजबूर हो गए। ओडिशा से आए पानी के कारण इंद्रावती नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। इससे जगदलपुर के प्रवीर वार्ड और विजय वार्ड पूरी तरह पानी में डूब गए हैं।
ओड़िशाजनित बाढ़ से मुकाबला करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन और जिला प्रशासन लगातार मुस्तैद हैं। सीएम साय ने प्रभावित इलाकों में तुरंत राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं ताकि बाढ़ पीड़ितों तक भोजन और दवाइयां पहुंचाई जा सकें।



