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The Stambh Analysis : महानदी हमारी लाइफलाइन… इसके पानी के लिए ओडिशा के नेता फिर आ रहे… भले ही वहां भी भाजपा सरकार, पर हमारा कम पानी पर मान लेना घातक

छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी नदी यानी महानदी के पानी के लिए ओडिशा के साथ 1936 से बंटवारे का विवाद चल रहा है। ओडिशा की तरफ़ से हमेशा ही दावा किया जाता रहा है कि महानदी का ज़्यादा पानी छत्तीसगढ़ ले रहा है। इस मुद्दे पर ओडिशा का रुख़ हमेशा सख़्त रहा, इसलिए जल विवाद बरक़रार है। अब ओडिशा में भी भाजपा सरकार है, इसलिए वहाँ से फिर विवाद सुलझाने की पहल हुई है। चूँकि दोनों राज्यों में भाजपा सरकारें हैं, इसलिए ओडिशा इस विवाद को संभवतः इस उम्मीद से फिर उछाल रहा है, ताकि पानी कम लेने पर छत्तीसगढ़ कोम्प्रोमाईज़ कर ले। इस मामले पर गहरी नज़र रखने वालों का मानना है कि एक लीटर पानी का कोम्प्रोमाईज़ करना भी छत्तीसगढ़ के भविष्य के लिए उचित नहीं होगा। उनका यह भी दावा है कि ओडिशा का 31 जनवरी को यहाँ आने वाला उच्चस्तरीय दल अपने पिछले स्टैंड से एक इंच भी पीछे नहीं हटने वाला है और यह दबाव बनाया जा सकता है कि समझौते में छत्तीसगढ़ को महानदी से कम पानी लेने पर विवश किया जाए।

ओडिशा के उपमुख्यमंत्री के.वी. सिंह देव की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति 31 जनवरी और 1 फ़रवरी को इसी मामले के लिए छत्तीसगढ़ का दौरा करने वाली है।इससे पहले, 23 जनवरी को भुवनेश्वर में एक बैठक बुलाई गई थी, जिसमें ओडिशा के दावे को और मजबूत करने पर मंथन की सूचना है। उपमुख्यमंत्री इस बैठक के बाद मीडिया को बताया था कि इस बैठक के निष्कर्षों के आधार पर ही छत्तीसगढ़ के सामने ओडिशा अपना पक्ष रखेगा। अब देखने वाली बात यही है क्या महानदी के पानी पर छत्तीसगढ़ के अफसर अपने पुराने स्टैंड पर अड़ेंगे या थोड़ा रिलैक्सेशन पर सहमति की तैयारी है। हालांकि इस बारे में कोई संकेत नहीं मिले हैं।

समझिए इस पूरे विवाद को

ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच महानदी नदी जल बंटवारा विवाद एक लंबे समय से चला आ रहा अंतर-राज्यीय जल विवाद है। महानदी भारत की प्रमुख नदियों में से एक है, जो छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सिहावा पर्वत से निकलती है और ओडिशा से होकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। इस नदी का अधिकांश ऊपरी हिस्सा छत्तीसगढ़ में और निचला हिस्सा ओडिशा में है। 2016 में ओडिशा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसके बाद केंद्र सरकार ने 2018 में महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल (Mahanadi Water Disputes Tribunal – MWDT) का गठन किया। यह इंटर-स्टेट रिवर वॉटर डिस्प्यूट्स एक्ट, 1956 के तहत हुआ था।

ओडिशा का दावा है कि छत्तीसगढ़ में महानदी और उसकी सहायक नदियों पर कई बैराज, एनिकट और डायवर्जन प्रोजेक्ट्स बनाए जा रहे हैं, जिससे ओडिशा में आने वाला पानी कम हो रहा है। इससे हीराकुड बांध (ओडिशा का सबसे बड़ा बांध) का जल स्तर घट रहा है, डेल्टा क्षेत्र में सूखा पड़ रहा है, सिंचाई प्रभावित हो रही है, और बाढ़/सूखे की समस्या बढ़ रही है। ओडिशा का कहना है कि इससे उसके लाखों किसानों और लोगों को नुकसान हो रहा है। जबकि छत्तीसगढ़ने शुरू से कहा है कि सिंचाई, पीने के पानी और औद्योगिक जरूरतों के लिए राज्य अपने हिस्से का पानी ले रहा है।

 

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