झारखंड ने सरकारी शराब दुकानों से कर ली तौबा… दुकानें लॉटरी से बाटेंगे, जैसा छत्तीसगढ़ में पहले होता था… ठेकेदारों की जंग में वहाँ सस्ती होगी शराब
छत्तीसगढ़ की तरह शराब दुकानें सरकारी तौर पर चलाने की पालिसी से सीमावर्ती झारखंड की सरकार ने तौबा कर ली है। वहाँ अब प्राइवेट लोग यानी ठेकेदार शराब दुकानें लेंगे। यह पालिसी छह साल पहले तक छत्तीसगढ़ में लागू थी। फिर इसे बदलकर शराब दुकानें सरकारी कर दी गईं। सरकारी शराब दुकानों के संचालन के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और ईओडब्लू ने शराब घोटाले में केस दर्ज कर कई अफसरों और कारोबारियों को जेल में डाल दिया। हाल में शराब मामले में सीबीआई की एंट्री भी हो गई। पालिसी को लेकर सीबीआई ने नकली होलोग्राम से जुड़ा केस दर्ज करते हुए झारखंड और छत्तीसगढ़ के अफसरों और कारोबारियों को लपेट लिया। जाँच शुरू होने के कुछ दिन बाद अब झारखंड पालिसी ही बदल दी। सरकारी दुकानों की जगह जल्द ही वहाँ ठेकेदारों की दुकानें नज़र आने लगेंगी। झारखंड ने सरकारी शराब सिस्टम पर केंद्रीय एजेंसियों के ताबड़तोड़ वार की वजह से पालिसी बदली या कोई और वजह है, अभी यह स्पष्ट नहीं हैं। झारखंड में सीएम हेमंत सोरेन की कैबिनेट ने नई पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। शराब दुकानों की लाटरी का सिस्टम भी तय कर दिया है। झारखंड के विश्लेषकों के मुताबिक ठेकेदारों में कॉम्पीटिशन के कारण वहाँ शराब काफ़ी सस्ती हो सकती है। बहरहाल, छत्तीसगढ़ में सरकारी दुकानें चलती रहेंगी।



