मीडिया को डिफेंस एडवाइजरी… वर्किंग-रिटायर्ड आर्मी अफसरों के परिजन-घर की रिपोर्टिंग से बचें… इंटरव्यू के लिए प्रॉपर चैनल से जाना होगा… सुरक्षा और प्राइवेसी का सम्मान टॉप प्रायोरिटी
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जाने अनजाने में ऐसी खबरों या रिपोर्ट्स का प्रसारण जिनसे न चाहते हुए भी बॉर्डर पर दुश्मन से दो दो हाथ कर रहे अफ़सर जवानों के परिजनों की प्राइवेसी प्रभावित हुई या ऐसे इंटरव्यू जिनका संबंध सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा, ऐसी रिपोर्ट्स को अवॉयड करने के लिए भारत के रक्षा मंत्रालय ने देशभर के मीडिया के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है। पाँच पॉइंट की यह एडवाइजरी रक्षा मंत्रालय में पदस्थ एडीजी विजय कुमार के दस्तख़त से जारी हुई है, जिसे प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो ने प्रसारित किया है। इस एडवाइजरी का विषय ही यही है कि मीडिया रिपोर्ट्स में सीनियर आर्मी ऑफिसर्स और उनके परिवार की निजता (प्राइवेसी) का सम्मान किया जाए।
डिफेंस मिनिस्ट्री ने कहा है कि मीडिया अपनी रिपोर्टिंग या स्टोरीज के लिए वर्किंग या रिटायर्ड डिफेंस अफसरों से या उनकी फ़ैमिली से संपर्क करने या सीधे निजी आवास पर जाने की कोशिश को अवॉयड करे। यह तब तक नहीं किया जाना चाहिए, जब तक कि यह मुलाक़ात ऑफिसियल चैनल से फिक्स हुई हो। मीडिया को ऐसे अफसरों के घर का एड्रेस, परिवार के फोटो और पहचान बताने वाले अन्य तथ्य छापने या प्रसारण से परहेज करना चाहिए। आर्म्ड फोर्सेज और लीडरशिप के क्रियाकलाप या फोकस्ड ऑपरेशनल एक्टिविटीज को भी मीडिया रिपोर्टिंग नहीं करनी चाहिए वगैरह। दरअसल इस एडवाइजरी का सार यही है कि मीडिया सूत्रों के हवाले से डिफेंस से जुड़ी खबरें बनाने से बचे, आर्मी ऑफिसर्स की निजता कायम रखी जाए तथा जवाबदेही के मापदंडों का मीडिया रिपोर्ट्स में हाई स्टैण्डर्ड नज़र आए।



