CG PSC scam : अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया के खाते में आए थे 67 लाख रुपए… ईडी ने प्रेस नोट जारी कर किया गिरफ्तारी के कारण का खुलासा

छत्तीसगढ़ के चर्चित पीएससी स्कैम की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बलरामपुर अपर कलेक्टर तथा पूर्व सीएम भूपेश बघेल के ओएसडी रहे चेतन बोरघरिया की गिरफ्तारी के कारणों का खुलासा किया है। ईडी के मुताबिक चेतन बोरघरिया की गिरफ्तारी की वजह यह है कि स्कैम की अवधि में उनके बैंक खाते में 170 ट्रांजेक्शन से 66.64 लाख जमा हुए थे। ईडी ने दावा किया कि जांच में सामने आया कि उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने पीएससी परीक्षा-2021 के विभिन्न उम्मीदवारों से कथित तौर पर ₹3 करोड़ से अधिक की अवैध रकम जुटाई। आरोप है कि उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और परीक्षा में चयन सुनिश्चित करने के नाम पर यह रकम ली गई। ईडी के अनुसार चेतन बोरघरिया जो उस समय मुख्यमंत्री कार्यालय में ओएसडी थे, इन गतिविधियों से जुड़े थे।
ईडी ने 1 सितंबर 2026 को बोरघरिया के परिसरों में तलाशी भी ली थी। एजेंसी के अनुसार तलाशी में मोबाइल फोन सहित कई डिजिटल उपकरण मिले, जिनसे बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच कथित बातचीत का पता चला। ईडी के मुताबिक इन बातचीत में रकम की वापसी और भुगतान की मांग से संबंधित बातें सामने आई हैं। जांच में M/s Figurecave E-Com (OPC) Private Limited के जरिए हुए लेन-देन की भी जानकारी सामने आने की बात ईडी ने कही है। एजेंसी का कहना है कि इस कंपनी का इस्तेमाल कथित तौर पर अपराध से अर्जित धन को जमा करने और घुमाने के लिए किया गया।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी )के रायपुर जोनल कार्यालय ने बताया कि चेतन बोरघरिया 7 दिन की ईडी रिमांड पर है। ईडी ने बताया कि डिजिटल साक्ष्यों, बैंक लेन-देन और जांच के दौरान दर्ज बयानों के आधार पर चेतन बोरघरिया को अपराध से अर्जित धन के अधिग्रहण, कब्जे और इस्तेमाल से जुड़ी गतिविधियों में कथित रूप से शामिल पाया है। इसलिए पीएससी 2020 और 2021 की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी, प्रश्नपत्र लीक और अवैध लेन-देन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तारी की गई है। ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है।



