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गुजरात के बाद राजधानी में… चौराहों पर पब्लिक से चुनकर 25 ट्रैफिक वार्डन उतारे… सबकी एक यूनिफार्म, कलेक्टर रेट पर मानदेय

राजधानी रायपुर में चौराहों पर सुबह-शाम बढ़ने वाले ट्रैफिक प्रेशर को संभालने के लिए प्रशासन और पुलिस ने मिलकर आम लोगों के बीच से 25 ट्रैफिक वार्डन चुनकर उतार दिए हैं। इन ट्रैफिक वार्डनों को कलेक्टर रेट के आधार पर रोजाना मानदेय भी दिया जाएगा। वार्डन जिला प्रशासन और नगर निगम ने मिलकर पुलिस को दिए हैं, ताकि शहर में ट्रैफिक अमले की कमी को पूरा किया जा सके। एक माह बाद सभी वार्डनों के कामकाज की समीक्षा की जाएगी। अगर इनका काम अच्छा रहा तो कंटीन्यू किया जाएगा।
सोमवार को एक कार्यक्रम में इन ट्रैफिक वार्डनों की नियुक्ति की घोषणा की गई। इस कार्यक्रम में आईजी अमरेश मिश्रा, कलेक्टर गौरव कुमार सिंह, एसएसपी लाल उमेद सिंह तथा निगम कमिश्नर विश्व दीपक के अलावा डीएसपी ट्रैफिक गुरजीत सिंह भी उपस्थित थे। आईजी अमरेश ने संबोधन में कहा कि देश में सबसे पहले गुजरात में ट्रैफिक वार्डन को पुलिस का हिस्सा बनाया गया था। छत्तीसगढ़ में रायपुर जिले से शुरुआत की जा रही है। ट्रैफिक वार्डन को पुलिस की तरह अधिकार प्राप्त नही होंगे। आपका उत्तरदायित्व होगा कि आपको जिस जगह पर यातायात व्यवस्था बनाने के लिए कार्य पर लगाया जाता है, उस जगह को सुगम बनाए। एसएसपी ने बताया कि रायपुर में सभी चौराहों में ट्रैफिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। बाजारों में सड़कों के दोनों ओर पार्किंग से हालात और बिगड़े हैं। ट्रैफिक पुलिस कम होने से सभी जंक्शन पर ड्यूटी नही लग पा रही है। 25 ट्रैफिक वार्डनों की नियुक्ति से राहत मिलेगी। सभी को ट्रेनिंग देने के बाद चौराहों पर उतार दिया जाएगा। जहां ज्यादा जाम लगता है, पहले इनकी वहीं तैनाती की जाएगी। एक माह के बाद इनके परफार्मेंस की समीक्षा की जाएगी। अगर ट्रैफिक वार्डन की मौजूदगी से व्यवस्था में बदलाव दिखा, जाम से लोगों को निजात मिली और लोगों ने प्रशंसा की, तो इन्हें कंटीन्यू किया जाता रहेगा।

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