Alert for Parents: 15 साल का लड़का महिलाओं-बच्चियों के वीडियो वायरल करने में फंसा… पड़ोसी का वाई-फाई लेकर दो साल से यह हरकत… दिल्ली सायबर से टिप, रायपुर में अरेस्टिंग
माता-पिता सुरक्षा के लिए बच्चों को मोबाइल फोन देते हैं। स्कूली बच्चों के लिए कई बार मोबाइल जरूरत की बड़ी चीज है। जिन बच्चों के पास स्मार्टफोन हैं, लगभग सभी एक्सपर्ट हो चुके हैं। इतने तेज कि पैरेंट्स चाहकर भी नहीं जान पाते कि उनका नाबालिग बच्चा स्मार्ट फोन पर क्या कर रहा है। खुद बच्चों को भी समझ नहीं होती कि जो कर रहे हैं, वह बेहद हीनियस क्राइम की श्रेणी में आ चुका है। बहरहाल, खबर ये है कि दिल्ली में बैठी सेंट्रल साइबर टीम, जो महिलाओं-बच्चों के आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने वालों के नंबर निकालकर संबंधित पुलिस को कार्रवाई के लिए भेजती है, उसने रायपुर पुलिस को ऐसा ही एक नंबर भेजा। पुलिस घर पहुंची तो पिता ने बताया कि नंबर 15 साल से कुछ अधिक उम्र का बेटा चला रहा है। पुलिस ने बेटे से पूछताछ की, तो उसने स्वीकार किया कि ऐसे वीडियो उसने सोशल मीडिया पर डाले हैं। उसे सख्त सायबर कानून के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है।
हैरतअंगेज बात ये है कि लड़के ने इस तरह का पहला वीडियो 2023 में वायरल किया था। खमतराई पुलिस की एफआईआर में उसी वर्ष का उल्लेख है। आरोपी के मोबाइल पर इंटरनेट डेटा नहीं रहता था। इसलिए उसने पड़ोसी के वाई-फाई का इस्तेमाल किया। वाई-फाई नंबर भी दिल्ली से आया था। पुलिस जब वाई-फाई मालिक के घर पहुंची, तब उसे पता चला कि उसका वाई-फाई लेकर लड़के ने आपत्तिजनक वीडियो शेयर किए हैं। जांच-पड़ताल के बाद पुलिस इस नतीजे पर पहुंची कि लड़के के पिता और वाई-फाई मालिक की प्रत्यक्ष गलती नहीं है। बच्चे ने कबूल किया कि वह ऐसा कर चुका है, इसलिए उसकी गिरफ्तारी की गई।
यह घटना पैरेंट्स के लिए भी अलर्ट करनेवाली
इस क्राइम में गौर करने वाली बात ये है कि लड़के ने यह हरकत अज्ञानता में की या जानबूझकर, कानूनी तौर पर इसके कोई मायने नहीं हैं। कार्रवाई के लिए सिर्फ यही तथ्य पर्याप्त है कि जो व्यक्ति मोबाइल चला रहा है, उसने ऐसे वीडियो-फोटो शेयर किए हैं। पुलिस अफसरों का ही मानना है कि यह संभव है कि बहुत सारे बच्चों को यह पता ही नहीं हो, कि ऐसी हरकत गंभीर अपराध की श्रेणी में है। दिल्ली में जो मानीटरिंग टीम बैठी है, उससे ऐसे नंबर बच नहीं सकते, जो इस तरह के वीडियो वायरल कर रहे हों। इसलिए जिन पैरेंट्स ने बच्चों को सुविधा के अनुसार मोबाइल दे रखे हैं, उन्हें इस मामले में अलर्ट रहने की जरूरत भी है।



