द स्तम्भ की खबर का तुरंत असर… मुख्यमंत्री ही हैं संस्कृति परिषद के पदेन अध्यक्ष… शशांक अब साहित्य अकादमी में, पुराना आदेश संशोधित

छत्तीसगढ़ सरकार ने दो दिन पहले 36 निगम, मंडल और आयोगों के साथ संस्कृति परिषद में भी अध्यक्ष की नियुक्ति कर दी थी। द स्तम्भ ने संस्कृति परिषद में अध्यक्ष की नियुक्ति के संबंध में प्रकाशित खबर में सरकार का ध्यान इस तरफ आकृष्ट किया था कि छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद में मुख्यमंत्री के पदेन अध्यक्ष रहने का प्रावधान हैं। जबकि शशांक शर्मा को इस परिषद का अध्यक्ष नियुक्त करने का आदेश हो गया है, जो नियमानुसार नहीं है। यह तभी संभव है, जब जब परिषद को पुनर्गठित किया जाए और पदेन अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष का क्लाज समाप्त किया जाए। संस्कृति परिषद के इस प्रावधान पर सरकार की ओर से तुरंत संज्ञान लिया गया है। संस्कृति परिषद के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति को संशोधित करते हुए 5 अप्रैल को जारी नए आदेश में शशांक शर्मा को साहित्य अकादमी का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया है। संशोधित आदेश में कहा गया है कि 4 सितंबर 2021 के द्वारा गठित साहित्य अकादमी में निहित प्रावधान के अनुसार शशांक को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से साहित्य अकादमी के अध्यक्ष पद पर नियुक्त कर दिया गया है।
द स्तम्भ ने इस तकनीकी मामले को उजागर करते हुए जानकारों के हवाले से यह भी बताया था कि इस चूक का सुधार तत्काल संभव है, और ऐसा ही किया गया है। दरअसल संस्कृति परिषद में पूर्व में जारी अधिसूचना के अनुसार परिषद में कुल 9 सदस्यों का प्रावधान है। सदस्यों में प्रतिष्ठित विद्वजनों को मनोनीत किया जाना है। परिषद के अंतर्गत ही कला संस्कृति की इकाइयों को भी समाहित किया गया है। इसी में सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान ये है कि संस्कृति परिषद के पदेन अध्यक्ष के रूप में मुख्यमंत्री तथा पदेन उपाध्यक्ष के रूप में संस्कृति मंत्री को नोटिफाई किया गया है। अर्थात परिषद में सीएम अध्यक्ष और संस्कृति मंत्री उपाध्यक्ष बने हुए हैं। ऐसे में नई नियुक्ति से नियमों का संकट पैदा हो गया है। सूत्रों के मुताबिक इसी नियम के आधार पर आदेश संशोधित कर दिया गया है।



