रायपुर रेंजर और नर्सरी प्रभारी समेत 5 सस्पेंड… डीएफओ से स्पष्टीकरण मांगा, एसडीओ को नोटिस… विधानसभा में ही दे दिया ग़लत जवाब

राजधानी की माना नर्सरी में एक स्व सहायता समूह को लेकर विधानसभा में उठाए गए एक सवाल के जवाब में रायपुर के वन अमले ने जो जानकारी दी, उसके ग़लत पाये जाने से वन विभाग में हड़कंप मच गया है। वन बल प्रमुख वी श्रीनिवास राव ने इस मामले में रायपुर रेंजर सतीश मिश्रा, नर्सरी प्रभारी तेजा सिंह साहू तथा तीन कर्मचारियों अविनाश वालदे, प्रदीप तिवारी और अजीत दडसेना को सस्पेंड कर दिया है। इसी मामले में रायपुर एसडीओ विश्वनाथ मुखर्जी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। यही नहीं, रायपुर डीएफओ लोकनाथ पटेल से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। इस स्व सहायता समूह के मामले में ही यहां पूर्व में पदस्थ कुछ और मंझोले वन अफसरों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ गए हैं। हालांकि अफसरों ने कहा कि ताज़ा कार्रवाई केवल विधानसभा को गुमराह करनेवाले जवाब के संबंध में ही की गई है। डीएफओ और एसडीओ को नोटिस इसलिए दिया गया है क्योंकि उनका निलंबन वन मुख्यालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। सूत्रों के अनुसार इस मामले में मार्च की शुरुवात में जो जांच प्रतिवेदन बनाया गया है, उसमे दोषियों के तौर पर डीएफओ और एसडीओ पहले और दूसरे नंबर पर हैं, इसलिए शासन से इनके ख़िलाफ़ भी कड़ी कार्रवाई की संभावना है।
पूरा मामला ऐसा है कि विधायक शेषराज हरवंश ने विधानसभा में प्रश्न लगाया था कि इंदिरा निकुंज माना नर्सरी में कार्यरत कुआरादेव महिला स्व सहायता समूह के कार्य संचालन के बारे में जानकारी दी जाए। इस तारांकित सवाल के जवाब में वन विभाग के जवाब में कहा गया कि इंदिरा निकुंज में ऐसा कोई स्व-सहायता समूह काम ही नहीं कर रहा है। यह जानकारी ग़लत निकली और तथ्य छिपाया गया, यह बात वन विभाग की उच्चस्तरीय जांच में आ गई और मामला विधानसभा के विशेषाधिकार हनन का बन गया। इस वजह से मचे हड़कंप के बाद वन बल प्रमुख ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले रेंजर तथा कर्मचारियों को सीधे सस्पेंड कर दिया। लेकिन इस मामले ने रायपुर वन अमले में चल रही कथित गड़बड़ियों की गांठें भी खोल दी हैं। बताते हैं कि इस मामले में आला अफसरों पर कार्रवाई की प्रतीक्षा तो की ही जा रही है, गड़बड़ियों के कुछ और गंभीर तथ्य भी सामने आने की संभावना है।



