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गाड़ियों के फिटनेस-लाइसेंस में अब और सख्ती… ग्रामीण बसें अभी 13 जिलों में, दायरा बढ़ाया जाएगा… परिवहन विभाग की समीक्षा में सीएम के निर्देश

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री ग्रामीण बसों का दायरा अब और बढ़ाया जाएगा। अभी 13 जिलों के 106 मार्गों पर 107 बसें चलाई जा रही हैं। सीएम विष्णुदेव साय ने परिवहन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान ग्रामीण बसें चलाने के लिए नए एरिया की पहचान करके वहां जल्दी बाद सेवा शुरू करने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने कहा कि ग्रामीण बसों ने कोंटा-जगरगुंडा जैसे दुर्गम इलाके में ऐसा बदलाव लाया है कि 6 घंटे का सफर अब लगभग 45 मिनट में ही पूरा हो रहा है।

समीक्षा बैठक में परिवहन मंत्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, परिवहन सचिव एस. प्रकाश, परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव प्रभात मलिक सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

बैठक में ऐसे ग्रामीण, वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों को प्राथमिकता से चिन्हित करने के निर्देश दिए गए, जहां अभी बसें या तो नहीं चल रही हैं, या नियमित नहीं हैं। बैठक में सीएम साय ने कहा कि दूरस्थ गांव को बस सेवा से जोड़ने का अर्थ वहां के लोगों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलना है। बैठक में दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के सकारात्मक प्रभावों की भी जानकारी दी गई। कोंटा से जगरगुंडा के बीच पहली बार प्रारंभ हुई बस सेवा से क्षेत्र के नागरिकों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिली है।

सीएम साय ने कहा कि सड़क सुरक्षा एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयास से जुड़ा विषय है। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों और ब्लैक स्पॉट की पहचान कर वहां ज़रूरी उपाय किए जाने चाहिए। । बैठक में बताया गया कि वर्तमान में राज्य के 23 ब्लैक स्पॉट में सुधार का काम चल रहा है। सीएम ने कहा कि सड़क दुर्घटना होने के बाद शुरुआती समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। घायल व्यक्ति तक जितनी जल्दी सहायता और चिकित्सा सुविधा पहुंचेगी, जीवन बचाने की संभावना उतनी ही बढ़ेगी। उन्होंने दुर्घटना की सूचना, एम्बुलेंस की उपलब्धता, नजदीकी अस्पताल तक पहुंच और उपचार की पूरी व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।*बैठक में बताया गया कि पीएम-राहत योजना के अंतर्गत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों तक 1.50 लाख रुपए तक कैशलेस उपचार की सुविधा का प्रावधान है। वहीं राहवीर योजना सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की समय पर सहायता करने वाले नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करती है।

वाहनों की फिटनेस जांच को सीएम ने और प्रभावी एवं तकनीक आधारित बनाने के निर्देश दिए। बैठक में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों की वर्तमान व्यवस्था और नए केंद्रों की स्थापना के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई।उन्होंने 15 वर्ष की अवधि पूरी कर चुके वाहनों के नियमानुसार नवीनीकरण और फिटनेस संबंधी प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) लगाने के अभियान को सुचारु एवं प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्धारित प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने के साथ वाहन मालिकों की सुविधा का भी ध्यान रखा जाए।

बैठक में ड्राइविंग टेस्ट के लिए विकसित की जा रही ई-ट्रैक व्यवस्था पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इसके अंतर्गत सीसीटीवी कैमरों और सेंसर आधारित प्रणाली के माध्यम से कम्प्यूटराइज्ड ड्राइविंग टेस्ट की व्यवस्था विकसित की जा रही है।

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