ज्ञानपीठ से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल नहीं रहे… छत्तीसगढ़ के प्रख्यात कवि-कथाकार की कलम 70 साल चलने के बाद थमी
देशभर में अपनी कथा-कविताओं से मशहूर तथा ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल का आज रायपुर में निधन हो गया। विनोद कुमार शुक्ल 88 वर्ष के थे और दो महीने से रायपुर एम्स में उनका इलाज चल रहा था। वे अपने पीछे पत्नी सुधा, एक पुत्र और एक पुत्री को छोड़ गए हैं। उनके निधन से हिंदी साहित्य जगत में शोक की लहर फैल गई है।
लगभग सात दशक तक विनोद कुमार शुक्ल निरंतर लिखते रहे। अस्वस्थ होने के बाद भी उनका लेखन जारी रहा। विनोद कुमार शुक्ल को हाल में ही भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ज्ञानपीठ से सम्मानित किया गया था। एक जनवरी, 1937 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में पैदा हुए विनोद कुमार शुक्ल रायपुर स्थित इंदिरा कृषि विश्वविद्यालय से 90 के दशक के मध्य में सेवानिवृत्त हुए थे, जहां वह प्राध्यापक थे। 1960 के दशक में जबलपुर स्थित कृषि विश्वविद्यालय में पढ़ाई करते समय वह राजनांदगांव में पहली बार महाकवि गजानन माधव मुक्तिबोध के संपर्क में आए थे। मुक्तिबोध 1958 में राजनांदगांव में नए स्थापित हुए दिग्विजय महाविद्यालय में हिंदी के प्राध्यापक बन कर आए थे।



