The Stambh Investigation : महादेव सट्टे में पूर्व सीएम भूपेश पर CBI की FIR चार माह पुरानी है… यह ईओडब्लू में सालभर पहले दर्ज केस की कापी… भूपेश उसमें भी आरोपी नंबर 6 ही थे

महादेव एप आनलाइन सट्टे में पूर्व सीएम भूपेश बघेल समेत चार आईपीएस तथा कई पुलिस-प्रशासनिक अफसरों और निजी लोगों पर सीबीआई ने पिछले हफ्ते छापे मारे और इसके दो दिन बाद यह बात सामने आई कि सीबीआई ने महादेव एप केस में भूपेश बघेल पर एफआईआर दर्ज कर ली है। उन्हें इस केस में छठवें नंबर का आरोपी बनाया गया है। द स्तम्भ ने इस मामले की पड़ताल की तो चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि भूपेश बघेल पर सीबीआई ने दो दिन पहले नहीं, बल्कि 18 दिसंबर 2024 को ठीक उस समय एफआईआर दर्ज कर ली थी, जब एजेंसी ने राज्य सरकार की अनुशंसा पर यह केस अपने हाथ में लिया था। भूपेश उसी एफआईआर में 21 आरोपियों की लिस्ट में छठवें नंबर पर थे। एक और दिलचस्प पहलू यह है कि सीबीआई की एफआईआर उस मुकदमे की कार्बन कापी है, जो छत्तीसगढ़ की एजेंसी ईओडब्लू ने मार्च 2024 में महादेव आनलाइन सट्टे में दर्ज दिया था। ईओडब्लू की उस एफआईआर में आरोपियों के नाम 21 बिंदुओं में थे और उसमें भी पूर्व सीएम भूपेश का नाम छठवें नंबर पर ही था।
महादेव एप केस में सबसे पहले एफआईआर छत्तीसगढ़ की एजेंसी ईओडब्लू ने जिन तथ्यों के साथ दर्ज की थी, सीबीआई की जांच उन्हीं तथ्यों के साथ आगे बढ़ाई जा रही है। ईओडब्लू के केस में 1 से 19 तक के आरोपी नामजद हैं। इनमें वह आरोपी भी हैं, जो देश से बाहर या देश में हैं। 20वें नंबर के आरोपी की जगह लिखा गया है- वरिष्ठ पुलिस अफसर और ओएसडी। 21वें तथा अंतिम हेड में इस केस से संबंधित अन्य निजी व्यक्तियों को जगह दी गई है। 20वें और 21वें नंबर में आरोपी नामजद नहीं हैं। सीबीआई अब जिनके यहां छापे मार रही है, उनसे नाम सामने आ रहे हैं। दरअसल सीबीआई को पूरा केस गहराई से जांच करने के लिए तो सौंपा ही गया था, एक बात यह भी थी कि केंद्रीय एजेंसी होने के नाते सीबीआई के हाथ विदेशों में बैठे आरोपियों तक पहुंचना ज्यादा मुश्किल नहीं है, लेकिन छत्तीसगढ़ की एजेंसी ईओडब्लू के लिए यह लगभग असंभव जैसा ही है। वरिष्ठ वकीलों का कहना है कि जब राज्य सरकारें कोई केस सीबीआई को सौंपती हैं, जो सिस्टम यह है कि राज्य में जो केस दर्ज होता है, उसी के आधार पर सीबीआई अपने यहां एफआईआर कर लेती है। महादेव केस में भी सीबीआई ने ईओडब्लू की एफआईआर को ही आधार बनाया है, जो मार्च 2024 में दर्ज की गई थी और जिसमें भूपेश बघेल 6वें नंबर के आरोपी बना दिए गए थे। जानकारों का कहना है कि सीबीआई ने महादेव एप मामले में छापेमारी की, इस वजह से वह एफआईआर भी अभी बाहर आ गई, जिसे केंद्रीय एजेंसी ने चुपचाप चार माह पहले और राज्य की एजेंसी ने सालभर पहले ही दर्ज कर लिया था।