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थाली-घंटी से कोरोना मारने के रिसर्च से चीनी रोबो कुत्ते को अपना बताने का सफ़र… किताब दुकान से 3 हजार करोड़ रु का एम्पायर खड़ा कर लिया “गलगोटिया” ने

चीनी रोबो कुत्ते को अपना बताकर एआई समिट को शर्मसार करने वाली गलगोटिया यूनिवर्सिटी का पाँच साल पुराना एक रिसर्च पेपर भी वायरल हो रहा है, जिस रिसर्च का निष्कर्ष यह था कि थाली और घंटी बजाकर कोरोना वायरस को ख़त्म किया जा सकता है। ग्रेटर नोएडा की इस बेहद महंगी प्राइवेट यूनिवर्सिटी (हर स्टूडेंट का एवरेज खर्च साल में 7 लाख रुपए तक) का विकास जिस भी तरह हुआ, लेकिन इसके मालिक इसलिए जगह-जगह सम्मानित होते रहे हैं कि किस तरह सुनील गलगोटिया का साम्राज्य एक छोटी सी किताब की दुकान से शुरू होकर आज ₹3,000 करोड़ से अधिक की वैल्यूएशन तक पहुँच चुका है।

रोबो कुत्ता विवाद के बाद आज गलगोटिया यूनिवर्सिटी का एक पुराना रिसर्च पेपर भी सामने आया है। रिसर्च का विषय था-“थाली और घंटी बजाकर कोरोना वायरस मारा जा सकता है!” यह लेख मार्च-अगस्त 2020 के एक जर्नल में प्रकाशित हुआ था। जिसमें तर्क दिया गया था कि विशिष्ट साउंड वाइब्रेशंस (ध्वनि कंपन) के माध्यम से वायरस को खत्म किया जा सकता है। उस समय दुनिया कोविड से जूझ रही थी और एब्सट्रैक्ट में लिखा गया था कि कोई स्पेशल वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। सपोर्टिव थेरपी के तौर पर ‘साउंड वाइब्रेशन’ से वायरस खत्म होने की उम्मीद जताई गई थी।

जानिए यूनिवर्सिटी मालिक की सक्सेस स्टोरी

यूनिवर्सिटी केसंस्थापक एवं कुलाधिपति सुनील गलगोटिया ने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से पढ़ाई की और 2011 में यूनिवर्सिटी की स्थापना की। उनके बेटे ध्रुव गलगोटिया 2011 से यूनिवर्सिटी के संचालन और डिजिटल विस्तार की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। गलगोटिया परिवार की दिल्ली के कनॉट प्लेस में ‘ई.डी. गलगोटिया एंड सन्स’ नाम की एक छोटी सी किताबों की दुकान थी। 1980 के दशक में सुनील गलगोटिया ने 9,000 रुपए उधार लेकर अपना पहला पब्लिशिंग वेंचर शुरू किया और बाद में कई अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों के साथ हाथ मिलाया। उन्होंने पहले गलगोटिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (GIMT) खोला, जिसे बाद में 2011 में उत्तर प्रदेश सरकार के अधिनियम के तहत पूर्ण विश्वविद्यालय का दर्जा मिला। आज यह कैंपस ग्रेटर नोएडा में 52 एकड़ में फैला हुआ है और यहाँ 40,000 से अधिक छात्र पढ़ते हैं।

गलगोटिया विवि उत्तर प्रदेश का पहला निजी विश्वविद्यालय बना जिसे NAAC द्वारा A+ रैंकिंग प्राप्त हुई। यूनिवर्सिटी का दावा है कि उनके यहाँ से 8,500 से अधिक जॉब ऑफर्स और करोड़ों के हाईएस्ट पैकेज दिए जा चुके हैं।यहाँ इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, लॉ और फार्मेसी सहित 100 से अधिक प्रोग्राम उपलब्ध हैं।

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