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कमल विहार की सड़कें दैत्याकार ट्रकों का नया बायपास-पार्किंग… सारी सड़कें बर्बाद, न आरडीए को मतलब और न पुलिस को

नया धमतरी रोड से पुराना धमतरी डायरेक्ट जाने के लिए ट्रांसपोर्टरों ने अपने दैत्याकार ट्रकों को कमल विहार का रास्ता दिखा दिया है। सेंट्रल इंडिया की सबसे बड़ी कॉलोनी कमल विहार की मुख्य सड़कों पर वहाँ रहनेवालों की गाड़ियों के लिए कम जगह बची है क्योंकि सौ-सौ टन लोड के ट्रक धड़ल्ले से आना-जाना कर रहे हैं। इन ट्रकों के कारण सड़कें चूर-चूर हो रही हैं। कमल विहार की हर मेन रोड पर छह-छह इंच के गड्ढे नज़र आने लगे हैं। हर ट्रक के गुज़रने के साथ सड़कें रोज़ाना क्विंटलों धूल उगल रही हैं और सबसे ख़ुशनुमा वातावरण वाली यह कॉलोनी धूल से पट गई है। यही नहीं, चौड़ी सड़कों को ट्रांसपोर्टरों ने शाम से सुबह तक पार्किंग में तब्दील कर दिया है।

कमल विहार पिछले दो साल से सरकारी तंत्र की ज़बरदस्त उपेक्षा का शिकार है। किसी ज़माने में भाजपा की ही सरकार का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट कमल विहार अभी बुरी तरह उपेक्षित है। वैसे तो बहुत सारी अव्यवस्थाएं हैं। इनपर गौर करने की तो उम्मीद भी नहीं है क्योंकि सड़कों पर जिस तरह की धमाचौकड़ी से लोग बेहाल हैं, आरडीए और पुलिस को वह भी नज़र नहीं आ रही है। हालत ये हैं कि अगर प्रशासन ने तुरंत ट्रकों की एंट्री और पार्किंग बंद नहीं करवाई, तो प्रदेश की सबसे बड़ी और व्यवस्थित कॉलोनी को ट्रांसपोर्टर कुछ दिनों में ही दस साल पहले वाले भनपुरी और टाटीबंध में तब्दील करने पर आमादा हैं।

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