पूरा पढ़िए, बचकर रहिएः 40 करोड़ कैश, 16 किलो सोने से भरा गड़ा हुआ हंडा… इसे हथियाने के लिए बैगा से तंत्र-मंत्र करवाकर डाका… घोर अंधविश्वास से भरा क्राइम, 24 घंटे में खुलासा

देश के हर इलाके का हर व्यक्ति अंधविश्वास से जुड़ी इस कहानी को जानता है कि कहीं-कहीं जमीन में हंडे में गड़ा हुआ धन रहता है। उस हंडे में करोड़ों रुपए का सोना चांदी भरा होता है। नाग देवता इसकी रखवाली करते हैं। जिसे हंडा अनुमति देता है, इसका धन वही निकाल सकता है और हंडा जमीन के भीतर चलायमान होता रहता है वगैरह… इस कथा को हर कोई जानता है और कोई इस पर विश्वास नहीं करता। लेकिन ऐसा नहीं है, कुछ लोग विश्वास करते भी हैं। छत्तीसगढ़ में खरोरा के एक गांव में कुछ लोगों को एक बैगा ने बताया कि एक घर में 40 करोड़ रुपए और 16 किलो सोने से भरा हंडा गड़ा हुआ है। उसी हंडे के धन से संबंधित व्यक्ति पैसेवाला होता जा रहा है। बैगा ने भरोसा दिलाया कि वह तंत्र-मंत्री कर उस घर के हर व्यक्ति को अपने वश में लेगा और सुला देगा। तब भीतर जाना और हंडा निकालकर ले आना। गांव और आसपास के डेढ़ दर्जन लोग हंडे की इस कथा के चक्कर में ऐसे फंसे कि उन्हें लगने लगा, जमीन से इसे निकालेंगे और आपस में बांटकर करोड़पति हो जाएंगे। इसके लिए बाकायदा बैगा की मदद ली गई। उसने घर से कुछ दूर खेत में साधना की, फिर बताया कि सब सो गए, हंडा ले आओ। अंधविश्वास की पट्टी आंखों में बांधे ये लोग उसी मकान में घुस गए लेकिन घरवाले जाग गए। हंडा तो मिला नहीं, घर में रखे पैसे, सोना-चांदी के जेवर छीनकर ले आए।
तकनीकी तौर पर यह बड़ी डकैती थी, जिसकी सूचना मिलते ही रायपुर पुलिस में हड़कम्प मच गया। क्राइम ब्रांच ने वहां कैंप कर दिया। एसएसपी डा. लाल उमेद सिंह ने 24 घंटे के भीतर प्रेस कांफ्रेंस लेकर पूरी कहानी और डकैती में शामिल 15 लोगों को मीडिया के सामने पेश कर दिया। इसी दौरान हंडे की यह कहानी सामने आई, ग्रामीण इलाकों में चापन और झरन जैसे अंधविश्वास का खुलासा भी हुआ, जिसने चौंका दिया है। एसएसपी डा. लाल उमेद सिंह ने खुलासा किया कि खरोरा के केवराडीह गांव के जिस राधेलाल नाम के व्यक्ति के यहां डकैती हुई, उसके बारे में अफवाह उड़ाई गई थी कि उसके अकूत धन-संपदा से भरा हुआ हंडा जमीन में गड़ा हुआ है। इसके बाद गांव के ही देवराज डहरिया और साथियों ने हंडा निकालकर उसका धन बांटने की योजना बनाई। धीरे-धीरे इस योजना में 15 लोग शामिल हो गए। इनमें 5 तो कवर्धा से पहुंचे थे। एक पुलिस का रिटायर्ड हवलदार और एक मौजूदा कांस्टेबल भी हंडे के धन में पार्टनर के तौर पर इस साजिश का हिस्सा बने। इसमें एक तांत्रिक को भी शामिल किया गया, जिसकी गिरफ्तारी बची है। आरोपियों को सबसे पहले साधना करने के बाद उसी ने बताया कि राधेलाल के कमरे में एक हंडा है, जिसमें 40 करोड़ रुपए और 16 किलो सोना भरा है। इस हंडे को हथियाने के लिए लोग जुड़ते गए। 27 मार्च को आधी रात के बाद तांत्रिक ने मकान से कुछ दूर खेत में फिर साधना की और बताया कि अब सब कुछ वश में है। जाकर हंडा निकाल लाओ। इसके बाद सभी ने मिलकर राधेलाल के घर में डाका डाला। इस समय प्रार्थी और पत्नी, मां, पुत्र, पुत्री, बहू एवं बहू की छोटी बहन अलग-अलग कमरों में सो रहे थे। राधेलाल का कमरा खुला था। रात 2 बजे सात नकाबपोश तलवार और चाकू लेकर घुसे। चार हथियारबंद नकाबपोश परछी में खड़े थे। डकैतों ने पूरे परिवार को धमकाया। इस दौरान एक-दो लोगों से मारपीट भी की। हंडा नहीं मिला तो नकाबपोशों ने राधेलाल की पत्नी से आलमारी और पेटी की चाबी ली। इसे खोलकर कैश और सोने-चांदी के जेवर मिलाकर 6 लाख रुपए का माल निकाला। हर कमरे में हंडे की तलाश की गई। हंडा नहीं मिला तो नकाबपोश सबके हाथ-पांव बांधकर भाग निकले।
इस डाके की जैसे ही रिपोर्ट की गई, पुलिस हरकत में आ गई। आईजी अमरेश मिश्रा और एसएसपी डा. लालउमेद सिंह के निर्देश पर एएसपी क्राइम संदीप मित्तल, एएसपी ग्रामीण कीर्तन राठौर डीएसपी क्राइम संजय सिंह, इंस्पेक्टर क्राइम परेश पांडेय और खरोरा टीआई दीपक पासवान समेत बड़ी फोर्स ने केवराडीह गांव में डेरा डाल दिया। वहां कोई कैमरा नहीं था, आरोपियों का कोई सुराग नहीं था, तब क्राइम ब्रांच ने हाईटेक एनलिसिस शुरू किया। कुछ घंटे में ही स्पष्ट हो गया कि वारदात में शामिल लोग परिचित हैं। इस प्वाइंट पर आगे बढ़ते हुए पुलिस को तिल्दा नेवरा के के जितेन्द्र पाठक की सूचना मिली। पहले तो उसने कुछ नहीं बताया। जब पुलिस ने सबूत सामने रखकर पूछताछ शुरू की, तो उसने सब उगल दिया। इसके बाद पुलिस ने मुंगेली, कबीरधाम, बलौदा बाजार, महासमुंद और रायपुर से देवराज डहरिया, ईश्वर रामटेके, सप्तऋषि राज, अलख निरंजन रजक, तिलक वर्मा, किशन वर्मा, रूपेश साहू, पिंकू राजपूत, सूरज सेन, छत्रपाल राजपूत उर्फ राजू, गज्जू चंद्रवंशी, प्रकाश मिश्रा, साहिल खान और सोना बारमते समेत 15 लोगों को कुछ घंटों में गिरफ्तार कर लिया। इनसे पूछताछ में हंडा, गड़ा धन और अंधविश्वास से भरी अफवाह का खुलासा हुआ, जिसके कारण डकैती जैसी गंभीर वारदात की गई।
एसएसपी ने दिया 10 हजार रुपए ईनाम
एसएसपी डा. लाल उमेद सिंह ने इस वारदात का खुलासा करने पर उक्त अफसरों के अलावा इंस्पेक्टर सत्येन्द्र सिंह क्राइम ब्रांच के एसआई राजेन्द्र सिंह कंवर, सतीश कुमार पुरिया, मुकेश सोरी, एएसआई गेंदुराम नवरंग, मंगलेश्वर परिहार, अतुलेश राय, शंकर लाल ध्रुव, हेड कांस्टेबल कृपासिंधु पटेल, रविकांत पाण्डेय, कुलदीप द्विवेदी, गुरूदयाल सिंह, आशीष त्रिवेदी, महेन्द्र राजपूत, चिंतामणी साहू, संतोष दुबे, घनश्याम प्रसाद साहू, जसवंत सोनी, प्रमोद वर्ठी, बसंती मौर्य, सुनील सिलवाल, उपेन्द्र यादव, दीपक बघेल, संतोष वर्मा, वीरेन्द्र भार्गव, जसवंत सोनी, तिल्दा से जालम साहू, आरक्षक धनंजय गोस्वामी, दिलीप जांगडे, संदीप सिंह, वीरेन्द्र बहादुर सिंह, भूपेन्द्र मिश्रा, गणेश मरावी, अविनाश देवांगन, प्रशांत शुक्ला, प्रवीण मौर्या, राकेश सोनी, धनेश्वर कुर्रे, गौरीशंकर साहू, हिमांशु राठौड़, आशीष पाण्डेय, मुनीर रजा, बोधेन्द्र मिश्रा, महिपाल सिंह, मुनीर रजा, राकेश सोनी, विक्रम वर्मा, विकास क्षत्रिय, गौरीशंकर साहू, संतोष सिन्हा, महेन्द्र पाल साहू, आशीष राजपूत, प्रकाश नारायण पात्रे, अभिषेक सिंह तोमर, राजेन्द्र तिवारी पुरूषोत्तम सिन्हा, अमित वर्मा, टेक सिंह मोहले, लालेश नायक, संजय मरकाम, तुकेश निषाद, अविनाश देवांगन, अनिल राजपूत, थाना खरोरा से उपनिरीक्षक सुरेन्द्र मिश्रा, सउनि. राजेन्द्र्र्र कुर्रे, प्र.आर. तोषण वर्मा, खिलेन्द्र वर्मा, आर. सुरेन्द्र सिंह चौहान, गजेन्द्र ध्रुवंशी, देव वर्मा और तिल्दा से कुलदीपक वर्मा को महत्वपूर्ण भूमिंका पर कुल 10 हजार रुपए का ईनाम घोषित किया है।