शिवनाथ के किनारे खेत में अफ़ीम को भुट्टा-ज्वार के ऊँचे पौधों में छिपाया… जब्त हरे-भरे डोडे का रेट 1 करोड़ रु से ज़्यादा… अब पुलिस ने खींचे धागे
(अफीम के फल यानी डोडे की फाइल फोटो)
दुर्ग में शिवनाथ नदी के किनारे करीब दो एकड़ खेत में जिस तरह से अफीम लगाई गई, यह इत्तेफाक या धोखा तो बिल्कुल नहीं है। अफीम के पौधे बीच-बीच में लगे हैं, जिन्हें भुट्टा और ज्वार के ऊँचे पौधे अच्छी तरह छिपा रहे हैं। अफीम के गोल फल यानी डोडा ज़्यादातर पौधों में लगा हुआ है। अफीम का खेत सामने देखकर लोग चकित हैं, क्योंकि अफ़ग़ानिस्तान का दृश्य यहीं दिख गया है। अब सवाल यह पैदा होता है कि अफीम के ये पौधे या बीज कहाँ से लाए गए थे? इतने परफ़ेक्ट खेती किनकी देखरेख में की गई, क्योंकि बेहद ठंडे इलाकों का अफ़ीम का पौधा यहाँ किस तरह लहलहा गया और फल लग गए?
पुलिस ने खेत से बड़ी संख्या में अफीम के पौधे और फल (डोडा) बरामद किए हैं। इसकी कीमत 1 करोड़ रुपए आंकी गई है। अफीम के पूरे पौधे उखाड़े जा रहे हैं और ज़ब्ती बन रही है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस नेटवर्क के पीछे कौन लोग शामिल हैं और अफीम की तस्करी कहां की जा रही थी। पता लगाया जा रहा है कि यह पूरा मामला देसी है, या फिर तार देश की सीमा के बाहर भी हैं।
इस मामले में संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह और एसएसपी विजय अग्रवाल भी खेत में पहुंचे हैं। दरअसल समूचे छत्तीसगढ़ में अफीम का खेत चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा यह भी है कि यह अकेला खेत है, या ऐसा कारनामा और भी खेतों में अंजाम दिया जा चुका है।



