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राजधानी में शांतिनगर और बीटीआई की सरकारी ज़मीनों पर अब आएंगे बड़े प्रोजेक्ट… साय कैबिनेट की इन्हें मिलाकर सात बड़े प्रोजेक्ट पर मोहर

(रहस्यमय ढंग से बंद शांतिनगर प्रोजेक्ट के फोटो)

राजधानी रायपुर के शांतिनगर में बड़ा हाउसिंग और कमर्शियल प्रोजेक्ट बनाकर करीब चार साल पहले कई पुराने सरकारी मकानों और बंगलों की तोड़फोड़ हुई, प्रोजेक्ट को छत्तीसगढ़ की एक बड़ी बिल्डर कंपनी को पीपीपी मोड पर सौंपने की बात आई और फिर पूरा प्रोजेक्ट अचानक रसातल में चला गया। अब सीएम विष्णुदेव साय कैबिनेट ने सोमवार को बड़ा फैसला करते हुए रायपुर में शांतिनगर और बीटीआई शंकरनगर समेत राजनांदगाँव, महासमुंद, जगदलपुर, कांकेर, कोरबा और कटघोरा में प्राइम लोकेशन पर खाली पड़ी सरकारी जमीनों और जर्जर हो चुके सरकार भवनों की जमीनों पर बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। शांतिनगर में 34.62 एकड़ सरकारी ज़मीन पर 11 सेक्टर्स बनाकर इसे कॉलोनी और कॉमर्शियल काम्प्लेक्स के तौर पर डेवलप करने का प्रोजेक्ट शुरू होकर बेहद रहस्यमयी ढंग से बंद हुआ था। तब सरकार का कोई भी ज़िम्मेदार पदाधिकारी यह बताने के लिए तैयार नहीं थे कि टेंडर वगैरह की प्रक्रिया शुरू हो जाने तथा हाउसिंग बोर्ड को एजेंसी बनाने के बाद यह प्रोजेक्ट क्यो रुका और तब सरकारी गलियारों में इस प्रोजेक्ट को लेकर इतना सन्नाटा क्यों छा गया था? अब जाकर इस प्रोजेक्ट पर कैबिनेट की मंजूरी के बाद जल्दी ही काम शुरू होने की उम्मीद है। यह एक-दो दिन में स्पष्ट होगा कि साय सरकार पिछले प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाएगी, या नई सिरे से प्रोजेक्ट पर काम शुरू होगा।

बता दें कि साय कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ के विभिन्न विभागों/निगम/मण्डल/कम्पनी/बोर्ड के जर्जर भवनों तथा इनके स्वामित्व की अनुपयोगी शासकीय भूमि के व्यवस्थित विकास और सदुपयोग के लिए रिडेव्हलपमेंट योजना के अंतर्गत 7 योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है। इसमें शांति नगर रायपुर, बीटीआई शंकर नगर रायपुर, कैलाश नगर राजनांदगांव, चांदनी चौक फेस-2 जगदलपुर, सिविल लाइन कांकेर, क्लब पारा महासमुंद, कटघोरा और कोरबा के प्रोजेक्ट शामिल हैं।

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