प्रदेश के 7 लाख अनिमयमित कर्मियों का वेतन 2017 से श्रम विभाग ने पुनरीक्षित नहीं किया… दो साल से सरकार को आग्रह लेकिन कोई सुनवाई नहीं

छत्तीसगढ़ के करीब 7 लाख अनियमित कर्मचारियों जैसे संविदा, दैनिक वेतनभोगी, मानदेय, जॉब दर, अंशकालीन, आउट सोर्सिंग, ठेका, सेवा प्रदाता और समूह-समिति के नियोजित कर्मचारियों का वेतन छत्तीसगढ़ के श्रम विभाग ने 2017 से पुनरीक्षित नहीं किया है। छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल साहू ने एक बयान में बताया कि श्रम विभाग न्यूनतम वेतन एवं वित्त विभाग द्वारा निर्धारित एकमुश्त संविदा वेतन के अनुसार समय-समय पर वृद्धि करता है। अनियमित कर्मचारियों की ओर से संघ पिछले दो साल से सरकार के हर मंच पर गुहार लगा रहा है, लेकिन कोई एक्शन नहीं हुआ है। नियमित कर्मचारियों के वेतन में नियमित वृद्धि के साथ मंहगाई भत्ते में वृद्धि की जा रही है, लेकिन अनियमित कर्मचारियों को लेकर कोई विचार नहीं हो रहा है। इससे सभी अनियमित कर्मचारी मायूस एवं आक्रोशित होने लगे हैं। जबकि ये कर्मचारी विगत कई वर्षों से शासन की जनहितकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वर्तमान में इनकी स्थिति मध्यकालीन बन्धुआ मजदूर से भी बदतर होती जा रही है।
संघ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अपने अधिकार के लिए संघर्षरत अनियमित कर्मचारियों के मंच पर (चुनाव पूर्व) अनेक वरिष्ठ नेता/जनप्रतिनिधियों ने समस्याओं को सुना तथा मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया। आश्वासन दिया गया कि सरकार की ओर से कमेटी गठित कर अनियमित कर्मचारियों को सम्मिलित करते हुए समीक्षा की जाएगी। लेकिन कमेटी के गठन में अनियमित कर्मचारियों का कोई उल्लेख नहीं है। कमेटी में अनियमित संघो के पदाधिकारियों को सम्मिलित नहीं करने से भी अनियमित कर्मचारी आक्रोश में है। छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल साहू ने बताया कि संघ की ओर से सरकार में हर मंच पर समस्याओं को रखा गया, लेकिन अब तक कोई पहल नहीं की गई है। संघ ने अनियमिति कर्मचारियों की मांगों पर सुनवाई नहीं होने की दशा में जल्दी ही प्रदेशस्तरीय बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी है।



