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छत्तीसगढ़ में 94 नई रेत खदानों को जल्द मंज़ूरी, 203 हो जाएंगी… इससे अवैध खुदाई रुकेगी, पर्याप्त सप्लाई से रुकेगी ब्लैक मार्केटिंग

छत्तीसगढ़ शासन निर्माण गतिविधियों को बढ़ाने, नदियों में अवैध खुदाई रोकने और ब्लैकमार्केटिंग को डेमोरलाइज़ करने के लिए प्रदेश में एक 94 नई रेट खदानों को जल्द शुरू करवाने जा रही है। अभी प्रदेश में 199 रेत खदान चल रही हैं। यही नहीं, अगले डेढ़ साल में रेत खदानों की संख्या बढ़ाकर 300 की जाएगी। अफसरों ने दावा किया कि इससे निर्माण कार्यो को बढ़ावा मिलेगा और अवैध खुदाई रुकेगी।

छत्तीसगढ़ सरकार रेत खनन नीति को अधिक पारदर्शी, संगठित, पर्यावरण-संवेदनशील और जनहितैषी बनाने के उद्देश्य से व्यापक कदम उठा रही है। जानकारों के अनुसार पूर्ववर्ती सरकार में राज्य में संचालित रेत खदानों की संख्या 300 से घटकर लगभग 100-150 रह गई थी। जिससे निर्माण कार्य प्रभावित हुए और अवैध खनन को बढ़ावा मिला। वर्तमान सरकार द्वारा खनिज नीति में सुधार कर रेत खनन की व्यवस्था को संगठित, नियंत्रित और जनहितकारी बनाया गया है।

प्रदेश में 119 रेत खदानें पर्यावरणीय स्वीकृति के साथ विधिवत संचालित हैं, जबकि 94 अन्य खदानों की मंजूरी प्रक्रिया अंतिम चरण में है। साथ ही, आगामी 1 से 1.5 वर्षों में 300 से अधिक नई खदानों को स्वीकृति दिए जाने की योजना है, जिससे रेत की आपूर्ति सुलभ बनी रहेगी और निर्माण कार्यों को गति मिलेगी।

विधिवत रेत खुदाई से नदियों पर असर नहीं

प्रमुख नदियों पर खनन के पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर IIT रुड़की से कराए गए अध्ययन में यह निष्कर्ष सामने आया है कि विधिवत और नियंत्रित रेत खनन से नदियों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। यह रिपोर्ट राज्य की वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित खनिज नीति को समर्थन प्रदान करती है।

अवैध खनन पर जारी है सख्त कार्यवाही

वर्ष 2024-25 से जून 2025 तक 6,331 अवैध खनन प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें से ₹18.02 करोड़ की वसूली, 184 मशीनों की जब्ती, 56 एफआईआर तथा 57 न्यायालयीन परिवाद दायर किए गए। जिला एवं राज्य स्तरीय टास्क फोर्सों द्वारा लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है, जिसमें खनिज, राजस्व, पुलिस, परिवहन और पर्यावरण विभाग के अधिकारी सम्मिलित हैं। अफसरों ने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन की नीति स्पष्ट है- खनिज संसाधनों के दोहन को जनहित, पारदर्शिता और पर्यावरणीय संतुलन के सिद्धांतों पर आधारित करना। संगठित, वैज्ञानिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से तैयार की गई यह नई रेत खनन नीति राज्य के समग्र विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए सशक्त आधार बनेगी।

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