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छत्तीसगढ़ ने डीआरडीओ की 18 एजेंसियों को बुलाया… बस्तर के जंगलों में दफ्न बारूदी सुरंगों की तलाश… नक्सलियों के साथ धमाकों के खतरे का भी खात्मा

बस्तर में 31 मार्च तक नक्सलियों के सफाए के साथ-साथ अब बस्तर के जंगलों और भीतरी रास्तों को बारूदी सुरंगों के खतरे से मुक्त करने पर छत्तीसगढ़ सरकार ने काम शुरू किया है। ऐसी आशंका है कि जंगलों में नक्सलियों ने हजारों की संख्या में बारूदी सुरंगें और प्रेशर बम जमीन में गाड़ रखे हैं, जो पैर पड़ते ही धमाका कर देते हैं। इन सुरंगों को ढूंढकर नाकाम करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने डीआरडीओ (डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन या रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) की मदद ली है। बस्तर में बारूदी सुरंगों की तलाश के लिए डीआरडीओ के 18 एजेंसियां बुलाई जा रही हैं। डिप्टी सीएम तथा गृहमंत्री विजय शर्मा ने यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि डीआरडीओ की एजेंसियां जल्दी ही बस्तर में बारूदी सुरंगों की तलाश शुरू कर देंगी। सरकार चाहती है कि नक्सली खात्मे के साथ-साथ माओवादियों ने जमीन में जो खतरे गाड़ रखे हैं, उन्हें भी निकालकर पूरी तरह नाकाम कर दिया जाएगा।

आपको बताते चलें कि DRDO (डीआरडीओ) यानी रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन  भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के तहत काम करने वाली एक प्रमुख रक्षा अनुसंधान एजेंसी है। जिसकी स्थापना 1958 में हुई थी और मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। सुरक्षा मामलों को लेकर यह देश की सबसे बड़ी एजेंसी है तथा हथियारों के रिसर्च और डेवलपमेंट में लगी है। डीआरडीओ के पास रक्षा वैज्ञानिकों की बड़ी ताकत है, जो बस्तर में बारूदी सुरंगों की तलाश में काफी कारगर और सक्षम है। सूत्रों के अनुसार डीआरडीओ ने बारूदी सुरंगों की तलाश करनेवाली गाड़ियां डेवलप की हैं। बस्तर को बारूदी सुरंगों से मुक्त करने में इनकी भी मदद ली जा सकती है।

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