रिटायर्ड IAS के लिए बुरा दिन… शराब स्कैम में पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास अरेस्ट… नान स्कैम में आलोक शुक्ला कोर्ट पहुंचे, सरेंडर नामंजूर

छत्तीसगढ़ में रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों के लिए गुरुवार का दिन ख़राब गुज़रा। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडबल्यू) ने पिछली सरकार में आबकारी आयुक्त रहे रिटायर्ड आईएएस निरंजन दास को शराब स्कैम में गिरफ़्तार कर लिया। उन्हें शुक्रवार को ईओडबल्यू कोर्ट में पेश कर रिमांड पर ले सकती है। इधर, 2020 के नान घोटाले में ईड़ी ने रिटायर्ड आईएएस आलोक शुक्ला के भिलाई के घर पर छापा मारा तो वे नहीं मिले और बताया गया कि शुक्ला एमपी में हैं। कुछ घंटे बाद शुक्ला रायपुर की विशेष कोर्ट में सरेंडर करने पहुंच गए। अपर कोर्ट का आदेश नहीं मिलने के कारण आलोक शुक्ला सरेंडर नहीं कर पाए और कोर्ट ने उन्हें वापस लौटा दिया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में EOW ने पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को गिरफ्तार किया है। कांग्रेस सरकार में निरंजन दास आबकारी आयुक्त की हैसियत से काम कर रहे थे। EOW ने दर्ज अपराध क्रमांक-04/2024, धारा-7,12 भ्र.नि.अधि. 1988 यथा संशोधित अधिनियम 2018 एवं 420, 467, 468, 471, 120 बी भादवि के तहत केस दर्ज करवाई है।
ईओडबल्यू में दर्ज केस के अनुसार गिरफ्तार किए गए रिटायर्ड आईएएस निरंजन दास पर आरोप है कि कमिश्नर रहते हुए निरंजन दास पर आरोप है कि उन्होंने शराब सिंडीकेट का सहयोग किया। सरकारी दुकानों में अवैध शराब की बिक्री, अधिकारियों के ट्रान्सफर और दोषपूर्ण शराब नीति लागू करने में पूरी मदद की। ईओडबल्यू का आरोप है कि निरंजन दास को कथित तौर पर 50 लाख रुपए महीना दिया जा रहा था।
चार्जशीट में यह आरोप भी है कि नोएडा की कंपनी प्रिज्म होलोग्राफी सिक्योरिटी फिल्म्स (विधु गुप्ता की) को टेंडर देने में निरंजन दास की भूमिका थी। यह कंपनी योग्य नहीं थी, लेकिन निरंजन दास और अरुणपति त्रिपाठी ने टेंडर की शर्तें ही बदल दीं। इसी कंपनी ने फर्जी होलोग्राम बनाए, जिनका उपयोग अवैध शराब को सरकारी दिखाने के लिए किया गया। प्रत्येक होलोग्राम पर 8 पैसे कमीशन लिया गया, जिससे प्रदेश के आबकारी विभाग को 1200 करोड़ का नुकसान हुआ।



