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दुर्ग में डिजिटल अरेस्ट से ठगे गए 41 लाख रु सायबर ठगों ने क्रिप्टो करेंसी में कन्वर्ट कर दुबई भेजे… बड़े गैंग का भंडाफोड़, गुजरात से 2 अरेस्ट

सायबर ठगों ने सीबीआई अफसर बनकर दुर्ग में एक महिला को वीडियो काल किया और लगभग सायबर अरेस्ट जैसे हालात पैदा कर उससे 41 लाख रुपए अलग-अलग खातों में जमा करवा दिए गए। महिला से कहा गया कि सीबीआई ने सायबर फ्राड की जांच करते हुए 180 म्यूल अकाउंट पकड़े हैं, जिनमें से एचडीएफसी बैंक का एक म्यूल अकाउंट उस महिला का भी है। फर्जी सीबीआई अफसरों ने महिला को दिल्ली आकर बयान देने के लिए धमकाया। केस सैटलमेंट की आड़ में महिला से कई बार में 41 लाख रुपए अलग-अलग खातों में जमा करवाए और फिर आरोपियों के मोबाइल बंद हो गए। इस मामले की जांच में दुर्ग पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। उसने गुजरात से दो युवकों मनीष दोषी और अशरफ खान को गिरफ्तार किया है। मनीष ने दुर्ग की महिला से रकम गुजरात में अलग-अलग खातों में जमा करवाई, फिर उसे निकालकर अशरफ को दे दी। उसने पूरी रकम क्रिप्टो करेंसी में कन्वर्ट की और दुबई भिजवा दी। दुर्ग पुलिस को इस गैंग के कुछ और लोगों का सुराग मिल गया है, इसलिए ज्यादा जानकारी नहीं दी जा रही है। मनीष के अपार्टमेंट से पुलिस ने नोट गिनने की मशीन तथा अशरफ के मोबाइल पर क्रिप्टो करंसी का एप भी पकड़ा है।

इस मामले में दुर्ग पुलिस की इन्वेस्टिगेशन भी काफी पुख्ता रही है। महिला की शिकायत पर केस रजिस्टर करने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की, तो पता चला कि ठगी गई रकम में से साढ़े 9 लाख रुपए गुजरात में राजकोट के नागरिक सहकारी बैंक में ट्रांसफर हुए थे। यह अकाउंट किसी आस्था लाजिस्टिक नाम की संस्था का था। जब पुलिस इस अकाउंट की तह तक गई, तब पता चला कि जिस दिन दुर्ग में ठगी हुई, उसी दिन इस खाते में रकम आई और इसे मनीष दोषी नाम के व्यक्ति ने निकाला। राजकोट के बैंक से मनीष का फुटेज भी मिल गया। फुटेज के आधार पर पीछा करते हुए पुलिस ने मोरबी के एक अपार्टमेंट में छापा मारकर मनीष को दबोच लिया। पूछताछ में उसी ने बताया कि पूरी रकम निकालकर उसने अशरफ के खाते में जमा कर दी। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने अशरफ को भी पकड़ लिया। उसने बताया कि पूरी रकम क्रिप्टो करेंसी में कन्वर्ट कर दुबई भेज दी है। अब पुलिस गुजरात में गिरोह के बाकी सदस्य तथा दुबई में रकम किन्हें भेजी गई, उनका भी पता लगा रही है।

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