फ़र्जी तबादला आदेश से 19 टीचर्स ने जॉइनिंग दे दी, अब हुआ खुलासा… शिक्षा विभाग ने बिठाई उच्चस्तरीय जांच… AI के उपयोग या विभागीय लिप्तता का भी शक

छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में इसी साल अगस्त में फर्जी आदेश निकालकर 19 शिक्षकों और व्याख्याताओं के तबादले कर दिए गए, और सभी ने नई पोस्टिंग पर जॉइन करके काम भी शुरू कर किया। इस फर्जीवाड़े का खुलासा अब जाकर हुआ है। से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने 6 अगस्त 2026 की तारीख वाले तबादला आदेश क्रमांक (ESTB-102/755/2026/20-3) को पूरी तरह से फर्जी करार दिया है। इस फर्जी तबादला आदेश से प्रभावित 15 जिलों के डीईओ से 3 दिन में रिपोर्ट मांगी गई है, साथ ही उच्च स्तरीय जांच भी शुरू कर दी गई है। इन जिलों में रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, दुर्ग, बेमेतरा, बस्तर, सारंगढ़-बिलाईगढ़, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बलरामपुर-रामानुजगंज, राजनांदगांव, उत्तर बस्तर कांकेर, बालोद, कबीरधाम, धमतरी, सरगुजा, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई हैं।
डीपीआई में अब तक की पड़ताल में पता चला कि फर्जी ट्रांसफर ऑर्डर को बिल्कुल असली दिखाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग के सरकारी लेटरहेड का इस्तेमाल किया गया था। इसके साथ ही, विभाग के अवर सचिव आर.पी. वर्मा के नाम, पदमुद्रा (सील) और हस्ताक्षर का भी दुरुपयोग किया गया था। आशंका जताई जा रही है कि इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तकनीक का सहारा लिया गया हो सकता है।
इस फर्जी सूची के आधार पर रायपुर समेत प्रदेश के 15 जिलों के शिक्षकों का ट्रांसफर दर्शाया गया था। हैरानी की बात यह है कि संबंधित जिलों के शिक्षा अधिकारियों (DEO) को इसकी भनक तक नहीं लगी और इस फर्जी आदेश के आधार पर शिक्षकों ने नए स्कूलों में जॉइनिंग भी ले ली थी।
जब यह मामला लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के संज्ञान में आया, तो उन्होंने तुरंत कड़ा रुख अपनाया। विभाग ने रायपुर समेत सभी 15 प्रभावित जिलों के DEO से 3 दिन के भीतर बिंदुवार विस्तृत रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज जमा करने के निर्देश दिए हैं। इस जांच के आधार पर फर्जीवाड़े में शामिल मास्टरमाइंड और मिलीभगत करने वाले कर्मचारियों की भूमिका तय कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।



