लोकसभा-विधानसभा सीटों के परिसीमन की तैयारी… इस पर संसद का विशेष सत्र दिवाली से पहले संभव… छत्तीसगढ़ में विस सीटें हो सकती हैं सौ के पार
देशभर में लोकसभा और राज्यों में विधानसभा सीटों के परिसीमन की प्रक्रिया जल्द शुरू करने की तैयारी है। केंद्र सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए दीपावली से पहले (अक्टूबर अंत तक) संसद का विशेष सत्र बुलाने जा रही है। परिसीमन विधेयक के तहत लोकसभा की कुल सीटों की अधिकतम संख्या वर्तमान 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। इनमें से 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आरक्षित की जाएंगी इसी तरह, राज्यों में विधानसभा सीटों पर मतदाताओं पर संख्या लगभा बराबर रखने के हिसाब से परिसीमन होगा। ऐसे में छत्तीसगढ़ में रायपुर समेत कई ऐसी सीटें टूटकर बढ़ेंगी, जहाँ वोटर संख्या औसत से कहीं अधिक है। इस वजह से रिज़र्व सीटें भी बढ़ेंगी और छत्तीसगढ़ में विधानसभा सीटों की संख्या हर हाल में 100 से अधिक हो सकती हैं।
निर्वाचन क्षेत्रों की भौगोलिक सीमाओं को दोबारा तय करने और अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) व महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने का काम एक नए, स्वतंत्र परिसीमन आयोग को सौंपा जाएगा। हालांकि यह सब परिसीमन बिल के पास होने के बाद ही संभव है। कांग्रेस समेत समूचा विपक्ष बिल पेश करने से पहले सर्वदलीय सहमति की मांग कर रहा है।
संसद में पेश ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ (Delimitation Bill, 2026) में भारतीय चुनावी और राजनीतिक व्यवस्था को बदलने वाली कई विशेष बातें शामिल हैं। जैसे, आम तौर पर परिसीमन नई जनगणना के बाद होता है, लेकिन इस विधेयक में प्रावधान है कि अगले परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग किया जाएगा। इससे 2027 की आगामी जनगणना पूरी होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
इसी तरह, 2029 के आम चुनावों से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का जो कानून है, उसे जमीन पर उतारने के लिए यह परिसीमन विधेयक लाया जा रहा है। इस बिल के जरिए सीटों का नए सिरे से बंटवारा होने के बाद ही महिला कोटा लागू हो सकेगा। यह विधेयक प्रत्येक राज्य को उसकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें आवंटित करने के मूल सिद्धांत पर रहेगा। इसका उद्देश्य है कि पूरे देश में सभी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की जनसंख्या और प्रति व्यक्ति वोट का मूल्य लगभग समान हो।
केंद्र सरकार का दावा है कि 50% वृद्धि मॉडल लागू होने के कारण दक्षिण भारत के राज्यों की सीटें घटने के बजाय बढ़ेंगी। उदाहरण के लिए, दक्षिण के राज्यों की सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी और कुल सदन में उनका प्रतिशत हिस्सा (लगभग 24%) पहले की तरह ही बरकरार रहेगा।
विपक्ष इस विधेयक का विरोध इस आधार पर कर रहा है कि यह संघवाद के खिलाफ है और इससे ज्यादा आबादी वाले उत्तर भारतीय राज्यों को अत्यधिक फायदा मिल सकता है। कांग्रेस व अन्य दलों ने इस बिल को सर्वदलीय बैठक बुलाकर व्यापक सहमति के बाद ही आगे बढ़ाने की मांग की है।



