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माओवादी सरगना “देवजी”… झीरम ताड़मेटला रानीबोदली नरसंहार का मास्टरमाइंड, 6 करोड़ का ईनाम… देवजी का सरेंडर बड़ी कामयाबी- सीएम साय

तेलंगाना में नक्सलियों के जिस सरदार देवजी उर्फ थिप्पिरी तिरुपति (Thippiri Tirupathi) ने आज सरेंडर किया, उसे भारतीय माओवादी आंदोलन के सबसे प्रभावशाली और खतरनाक रणनीतिकारों में से एकमाना जाता रहा है। छत्तीसगढ़ की सबसे हिंसक नक्सली वारदातों झीरम घाटी में कांग्रेसियों का नरसंहार तथा ताड़मेटला और रानीबोदली में फोर्स पर बड़े हमलों समेत 135 जवानों की मृत्यु के षड्यंत्रों का मास्टरमाइंड देवजी को ही माना जाता है। देवजी पर छत्तीसगढ़ सरकार और एनआईए की तरफ़ से एक एक करोड़ रुपए समेत कुल 6  करोड़ रुपए का ईनाम देशभर में है। यही वजह है कि माओवाद से निर्णायक लड़ाई लड़ रहे छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने देवजी के सरेंडर को बहुत बड़ी सफलता करार दिया है।
देवजी का ताल्लुक मूल रूप से तेलंगाना के जगित्याल (पूर्व में करीमनगर) जिले के एक दलित परिवार से है। देवजी ने 1980 के दशक में रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन (RSU) के माध्यम से नक्सलवाद की राह पकड़ी थी।

नक्सलियों की सैन्य शाखा, पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की पहली सशस्त्र प्लाटून बनाने का श्रेय देवजी को ही दिया जाता है।

छत्तीसगढ़ में देवजी काफ़ी सक्रिय रहा और यहाँ हुए सभी घातक नक्सली हमलों में प्रमुख रोल रहा। दंतेवाड़ा में 2010 को ताड़मेटला में हुए भीषण हमले में CRPF के 76 जवान शहीद हुए थे, जिसकी रणनीति देवजी ने ही तैयार की थी। इसी तरह झीरम घाटी में 2013 में  छत्तीसगढ़ कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व (विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश) समेत 29 की नक्सलियों ने नृशंसता से हत्या कर दी थी। देवजी इस हमले के मुख्य योजनाकारों में से एक था। इसी तरह, बीजापुर में एक पुलिस कैंप पर हुए इस हमले में 55 जवानों की जान गई थी, जिसका नेतृत्व देवजी ने किया था।

देवजी CPI (माओवादी) की पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति के सदस्य रहा। मई 2025 में नंबला केशव राव (बसवराजू) की मृत्यु के बाद देवजी को संगठन का महासचिव (General Secretary) नियुक्त किया गया था।

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