रेरा (RERA) बिल्डरों को ही लाभ पहुंचा रहा है तो बंद कर देना चाहिए- सुप्रीम कोर्ट… रायपुर में भी है रेरा दफ्तर, राज्यों को गठन पर फिर विचार के निर्देश
रियल एस्टेट कारोबार को नियंत्रित करने वाली तथा प्रापर्टी खरीदने वाले आम लोगों को सुविधा दिलाने के लिए गठित किए गए रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथारिटी (रेरा) के कामकाज पर सुप्रीम कोर्ट ने कल और आज (12 और 13 फरवरी) सुनवाई करते हुए अत्यंत तीखी और सख्त टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने यहाँ तक कह दिया कि है यदि यह संस्था केवल बिल्डरों को फायदा पहुँचा रही है, तो इसे बंद कर देना ही बेहतर होगा। कोर्ट ने RERA में रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए हैं। CJI ने टिप्पणी की कि आर्किटेक्ट या पर्यावरण विशेषज्ञों के बजाय सिर्फ अधिकारियों को बिठाने से शहरी विकास और खरीदारों की समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। बता दें कि रेरा छत्तीसगढ़ के रायपुर में भी है और यहां रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट ही रेरा के चेयरमैन हैं।
लांकि सुप्रीम कोर्ट जिस मामले की सुनवाई कर रही है, वह छत्तीसगढ़ का नहीं है। फिर भी, सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे RERA के गठन और इसके वर्तमान स्वरूप पर फिर से विचार (revisit and rethink) करें। चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि RERA घर खरीदारों की सुरक्षा करने के बजाय केवल डिफॉल्टर बिल्डरों को सुविधा (facilitating) पहुँचाने का काम कर रहा है। कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों के लिए इस संस्था का गठन किया गया था, वे आज पूरी तरह से “हताश, निराश और दुखी” हैं। खरीदारों को कोई प्रभावी राहत नहीं मिल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी हिमाचल प्रदेश सरकार की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की है। याचिका हिमाचल रेरा के दफ्तर को शिमला से धर्मशाला शिफ्ट करने को लेकर विवाद से जुड़ी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को दफ्तर शिफ्ट करने की अनुमति तो दे दी, लेकिन नियामक के प्रदर्शन पर गंभीर चिंता व्यक्त की।



