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रायपुर-वाल्टेयर नए हाईवे पर पौने 3 किमी की अद्भुत सुरंग… ऊपर टाइगर का आना-जाना, इसलिए गाड़ियां जाएंगी टनल से

रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर का छत्तीसगढ़ के पहले 6-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे होगा। यह हाईवे इंजीनियरिंग चमत्कार और पर्यावरण सुरक्षा उपायों से भरपूर है, जिसकी कई खासियतें हैं। जैसे, उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) के भीतर 2.79 किमी की ट्विन-ट्यूब सुरंग बनाई गई है। यह सुरंग सुनिश्चित करेगी कि यह टाइगर कॉरिडोर और टाइगर्स का मूवमेंट पहले की तरह निर्बाध चलता रहे और ट्रैफिक को इस पहाड़ी इलाके के बीच एक त्वरित मार्ग मिले।

रायपुर-विशाखापट्टनम के बीच 464 किमी के इस विशाल प्रोजेक्ट की लागत ₹16,491 करोड़ हैं। इस हाईवे का छत्तीसगढ़ का पार्ट 125 किमी है। इसे लगभग ₹4,146 करोड़ की लागत से तीन प्रमुख पैकेजों (झांकी से मारंगपुरी) में बनाया जा रहा है। एनएचएआई के रीजनल ऑफिसर प्रदीप कुमार लाल ने बताया एनएचएआई ने प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी को प्राथमिकता देते हुए शानदार इंजीनियरिंग की है। इस प्रोजेक्ट में जंगली जानवरों के लिए सुरक्षा के अग्रणी उपाय शामिल हैं, जैसे कि मंकी कैनोपी और समर्पित एनिमल अंडरपास। हाईवे बन जाने के बाद रायपुर से विशाखापट्टनम की यात्रा का समय वर्तमान 12 घंटे से घटकर मात्र 6-7 घंटे रह जाएगा, जिससे ईंधन की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी।

रीजनल ऑफिसर लाल ने बताया कि वन्यजीवों की सुरक्षा और सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए एनएचएआई ने इस कॉरिडोर में अत्याधुनिक तकनीक और बुनियादी ढांचे का समावेश किया है। परियोजना के तहत जंगली जानवरों को सड़क दुर्घटनाओं से बचाने के लिए कई एनिमल ओवरपास, एनिमल अंडरपास और मंकी कैनोपी बनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, टक्कर के प्रभाव को कम करने के लिए ट्रैफ़िक इम्पैक्ट एटिन्‍यूएटर (Traffic Impact Attenuators) प्रणाली स्थापित की गई है, जो दुर्घटना की स्थिति में जनहानि को काफी हद तक कम कर देगी। सुरक्षा और निगरानी को मजबूत करने के लिए पूरे मार्ग में उन्नत कैमरा सिस्टम भी तैनात किए जा रहे हैं।

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